शादी,
ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं।
शादी तय होने से लेकर विदा होने तक आप ऐसी अलग-अलग यादें बनाते हैं जो आपको लाइफटाइम याद रहे।
मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है, तेजस्विनी ओझा से तेजस्विनी अंकुर बाजपेयी बनने का सफर बहुत ही प्यारा है।
शादी के बाद हर लड़की को एक नया घर मिलता है, एक नया रिश्ता जुड़ता है, नया माहौल, नए लोग सब कुछ नया, सब कुछ एक सपने जैसा लगता है, एक मीठा प्यारा सपना।
छोटी मोटी, नोक झोंक पर मन में ढ़ेर सारा प्यार यही पति पत्नी के रिश्ते को और मजबूत करता है, और रिश्ते की नींव होती है बॉन्डिंग।
लाख नाराज होने पर भी ख्याल रखना, "पता नही खाना खाने का समय मिला होगा या नही" "पता नही अपना ध्यान रख रहे होंगे कि नहीं" उफ उफ उफ इतने सारे सवाल पूरे पूरे दिन दिमाग में चलते हैं तो लगता है कि हां इसको ही प्यार कहते हैं, सिर्फ प्यार नही पारलौकिक प्रेम कहते हैं, ऐसा प्यार जिसे सोचकर लगता है की हां यही रिश्ता मुझे सात जन्मों तक चाहिए।
मां पापा के जैसा सपोर्ट मिल तो लगता है लाइफ पटरी पर आ गई है, सब कुछ जैसे अपना लगने लगता है, जो चीजें नहीं आती वो सीखना, सुबह शाम की आरती में उनका साथ देना, बातें करना, साथ में चाय पीना ।
ननद का प्यार मिलना तो जैसे की ने हाथ पकड़ कर कहा हो, "अरे घबराओ नहीं , मैं हूं ना तुम्हारे पास" अकेले होने पर दिन में तीन बार पूछना "बेटू खाना खा लिया", "अपना ध्यान रखना" "क्या भिजवा दूं तुम्हारे लिए" "कोई भी चीज की जरूरत पड़े तो ले जरूर लेना" ये सब चीजें इतना अपनापन देती हैं कि लगता है की मैं बहु नही बल्कि इस घर की बेटी हूं, और भोलेनाथ की कृपा से जीवन सफल हो गया है।
हां लखनऊ छोड़ना मेरे लिए आसान नहीं था, अपने मम्मी पापा को अकेले छोड़ के आना तो बिलकुल भी नहीं, रोज़ उनके साथ बैठना, मूवीज़ देखना, डांस करना, उनको परेशान करना, पापा का लैपटॉप की सेटिंग्स के साथ छेड़ छाड़ करना आज शादी के दस महीने बाद भी मुझे याद आता है, मम्मी के हाथ का राजमा चावल तो खास तौर से पर इस बात को खुशी भी है की यहां आकर मुझे दुनिया के सबसे प्यारे और सबसे खूबसूरत रिश्ते मिले।
आज पता नही कैसे लैपटॉप खुला है और लिखने का मन कर बैठा, आज समझ में आया कि लिखने के लिए सिर्फ दिमाग की जरूरत नहीं होती, कुछ बातें जब दिल से लिखी जाती हैं, तो उसकी छाया अलग ही उभर कर आती है, और शायद मन से कागज़ पर उतारे गए शब्द अलग छाप छोड़कर जाते हैं।
इतने सालों बाद लिख कर बहुत अच्छा लगा।
- तेजस्विनी अंकुर बाजपेई।



धरती एक बहुत ही सुन्दर सी जगह जहां हम सब लोग रहते हैं एक अनोखा प्लेनेट जहां प्रकृति हम पर मेहरबान है क्या नही है हमारी धरती पर पानी उपजाऊ मिटटी और सबसे ज़रूरी चीज़ पेड़ पौधे जिनसे हमें ऑक्सीजन मिलती है पर पता नही क्यों लोगो को ये बात समझने में वक़्त लगता है की पेड़ हमारे वातावरण के लिए ज़रूरी है. जहां ज़रुरत पड़ी लकड़ी है वहाँ लगे पेड़ पर आरी चलाने या अगर कोई पेड़ कार खडी करने का रास्ता रोक रहा है तो बस आ जाता है लोगों को गुस्सा और उतार देते हैं पेड़ों पर.ये आगे जाकर आपके लिए ही नही नेचर के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है. आईये आपको एक कहानी सुनाती हूँ मेरे घर के पास एक नया पेड़ लगा है गुलमोहर का और देखते हुए ख़ुशी हो रही है की वो पेड़ बारिश की बूंदों के साथ बड़ा हो रहा है. आपको हैरानी होगी जब आपको ये पता चलेगा की वो पेड़ वन विभाग के अधिकारोयों ने नही बल्कि एक बूढ़े आदमी ने लगाया है जब पहली बार मैंने उस आदमी को पेड़ लगाते हुए देखा था तो लगा शायद कपडे डालने के लिए वो तार लगा रहा होगा पर जब एक दिन हमलोग तेहेलने निकले तो देखा की उस पेड़ में पत्तियाँ आ रही हैं यकीन मानिए मेरा मन ख़ुशी से झूम रहा है मुझे इंतज़ार है की कब वो पेड़ बड़ा होगा. तो देखा आपने जब एक वृद्ध आदमी उस पेड़ को लगा सकता है अपने पर्यावरण का ध्यान रख सकता है तो हम और हमारा यूथ क्यों नही, आज के यूथ के पास एडवांस टेक्नोलॉजी के गैजेट्स हैं 4जी फ़ोन है अनलिमिटेड डाटा है तो क्या एक कदम हमलोग अपने पर्यावरण को बचाने में नही ले सकते हमलोग प्राइमरी से पढ़ते आ रहे हैं की पेड़ हमारे नेचर के लिए सबसे ज़रूरी है पर शायद बड़े होकर हमलोग वो लेसन भूल चुके हैं. प्लीज आज के समय में हमारे नेचर को प्योर हवा की ज़रुरत है हमें प्योर हवा की ज़रुरत है 1970 में हुए चिपको आन्दोलन को फिर से शुरू करने की ज़रुरत पड़ने लगी है. अपने थोड़े से टाइम के बेनिफिट के लिए अपने पर्यारण को जोखिम में मत डालिए पर ये देखकर अच्छा लगता है की कुछ लोग वन विभाग के लगाए पेड़ों की जाली न बेचकर उन पेड़ों का अच्छे से ध्यान रख रहे हैं वो लोग ज्यादा पढ़े लिखे नही हैं पर अपने नेचर का ख्याल रखना उन्हें बखूबी आता है. आप भी चाहे तो दूर नही अपने घरों के पास पेड़ लगा सकते हैं बाहर निकलिए अपने आस पास देखिये पेड़ काटने वालों को रोकीये जितना हो सके ईको फ्रेंडली चीज़ों का इस्तेमाल करीए मैं यूथ से कहना चाहती हूँ आप चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं नेचर से रिलेटेड बुक्स पढ़िए गूगल सर्च करीए नही तो ग्लोबल वार्मिंग जैसी हानिकारक लेयर हमारी प्यारी से धरती को नष्ट कर देगी. आई थिंक आप तक मेरे कहने का मतलब पहुच गया होगा बाकी सारी एक्टिविटीज हमे आपको और हमको मिल कर करनी होगी मैं तो तैयार हूँ क्या आप तैयार हैं..??
