तेजस्विनी के दोहे #१
#१ लो आ गया 15
अगस्त, लो आ गया 15 अगस्त,
दुकानदार हज़ारों ऑफर
ले कर आये
तरह तरह के ऑफर दे
कर, तरह तरह के ऑफर दे कर,
क्यों हमे उल्लू
बनाएं रे हाय रे क्यों हमे उल्लू बनाएं.
भगवान् को तो छोड़ दो
भगवान् को तो छोड़ दो तुम,
क्यों उन्हें बदनाम
कराये,
उनके नाम पे पैसा ले कर,
क्यों तो ठगी मचाये
रे हाय रे क्यों तू ठगी मचाये.

1 comment:
वाह क्या बात
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