आज मेरी खिड़की पर आ बैठी एक चिड़िया,
मैंने पूछा कैसे बनता है तेरा आशियाना,
बोली होना है मुश्किल बनाना ,
जोड़ती हूँ मैं तिनका-तिनका पड़ता है खाना लाना,
कभी कभी बच्चे खेल में तोड़ देते हैं मेरा ठिकाना।
रात होती ही काँप उठती हूँ मैं डर से,
आती है आवाज़ें उसकी(उल्लू की) न जाने कहाँ से,
फिर सुबह होती है नए उजाले के साथ ,
फिर हवा बतियाने लगती है मेरे साथ -साथ ,
जुड़ती है मेरी हर ख़ुशी तिनके के साथ साथ।
-- तेजस्विनी तमन्ना ओझा।
मैंने पूछा कैसे बनता है तेरा आशियाना,
बोली होना है मुश्किल बनाना ,
जोड़ती हूँ मैं तिनका-तिनका पड़ता है खाना लाना,
कभी कभी बच्चे खेल में तोड़ देते हैं मेरा ठिकाना।
रात होती ही काँप उठती हूँ मैं डर से,
आती है आवाज़ें उसकी(उल्लू की) न जाने कहाँ से,
फिर सुबह होती है नए उजाले के साथ ,
फिर हवा बतियाने लगती है मेरे साथ -साथ ,
जुड़ती है मेरी हर ख़ुशी तिनके के साथ साथ।
-- तेजस्विनी तमन्ना ओझा।

4 comments:
Wah kitani shaandar lines hain. isme beti bachao aur pakshi bachao ka sandesh bhi hai... Great
Superb bahut hi acchi line hai zindgi jine ka ek tarika jo sayad ham bhulte ja Rahe hai.
Outstanding..... Tejaswini
Thank you Papa and Nitin.. :)
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