Sunday, 28 September 2014

आखिर गलती किसकी ??

पिछले दिनों एक सुबह न्यूज़ देखी तो रोंगटे खड़े हो गए। एक लडक़ा पता नहीं कैसे दिलली जू में बाघ  के बाड़े के अन्दर घुस गया...जहां वो बाघ के सामने हाथ-पैर जोडक़र बैठा हुआ था करीब दस मिनट। पर बाघ पर उसका को असर नहीं और आखिर में बाघ ने उसे मार ही डाला। अब सवाल ये है की गलती किसकी है - लडक़े की, जू ऐडमीनिसट्रेशन की या बाघ की पर शायद बाघ की कोई गलती नहीं है। वो उस लडक़े को शायद छोड़ देता अगर लोग उसपर पत्थर न फेकते। पत्थर फेकने की वजह से वो
बाघ और भडक़ गया और उसने गुस्सा  लडक़े पर उतारकर उसका दी एंड कर दिया। प्रशासन से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा की बोर्ड पर साफ़ साफ़ चेतावनी लिखी गयी है पर फिर भी शायद फोटो खीचने के चक्कर में वो लडक़ा बाड़े के बहुत पास चला गया और बैलेंस न कर पाने की वजह से वो अन्दर गिर पड़ा।
सिर्फ यही इंसिडेंट नहीं आज कल तो शेर और बाकी जंगली जानवर गाँव में घुस आते हैं और खेतों में काम कर रहे लोगों को मार देते है और गाँव के लोग अगर शेर को पकड़ भी लेते हैं तो वन विभाग के हवाले करने के बजाये उस शेर को पीट- पीट के मार डालते हैं। यहीं मेन कारण है की शेरों की संख्या में बहुत तेज़ी से कमी आ रही है। शेरों के भाग कर शहर आने में भी हमारी ही गलती है। हम लोग जंगलों को काट रहे हैं इसी वजह से जंगली जानवर भाग-भाग के गाँव और शेहेरों की तरफ रुख कर रहे हैं। आखिर दोषी है कौन? सब तो अपनी रिसपॅान्सीबीलीटीज से पल्ला झाड़ रहे हैं पर शायद ये सब गलती हमलोगों की ही है। न हमलोग जंगल काटते, न शेर शहर में आता न गाँव के लोग उसे पकड़ते और न ही उसकी पीट-पीट कर हत्या होती।

Sunday, 7 September 2014

अल्ले भाई हम भी फेच्बूक पल हैं

आज आप देखेंगे हर कोई फेसबुक का इस्तेमाल करता है। इवेन कैंटीन चलाने वाले भी बड़ी होशियारी से फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं। आज किसके-किसके हाथों में मोबाइल फ़ोन है आप इमेजिन ही नहीं कर सकते हो। आजकल की हाई प्रोफाइल फॅमिली अपने स्टेटस का शो ऑफ करने के लिए नए फोंस नए लैपटाप्स का इस्तेमाल करते हैं। इस मामले में छोटे बच्चे भी पीछे नहीं हैं। वो बच्चे जो अभी सिर्फ 9 या 10 साल के होंगे, उनके हाथ में आप नए और महेंगे आई फोंस देख सकते हैं। पेरेंट्स भी आँख मूंदकर अपने बच्चो को फ़ोन दे देते हैं और बच्चे पहले गेम्स खेलेंगे फिर नेट पे डाउनलोडिंग करेंगे फिर धीरे से फेसबुक पर पहुँच जाएंगे और दुनिया भर के लोगों को ऐड करेंगे जिनको वो शायद जानते ही नहीं हैं। बच्चो को नहीं पता चलेगा और उनकी फॅमिली की सारी पर्सनल बातें उन लोगों को पता चल जाएंगी जो लोग उस बच्चे को या उसकी फॅमिली को जानते तक नहीं हैं। आप ही बताइये ये कितना सेफ है? अनजान लोगों के कांटेक्ट में आना सबसे खतरनाक है। पर ये गलती सिर्फ बच्चों की नहीं है बल्कि उनके पेरेंट्स और सोशल नेटवर्किंग के वेब डेवलपर्स की भी है की कुछ स्टेप्स को फॉलो करके कोई भी अपनी आईडी आराम से बना सकता है। उम्र बंधन का कोई फायदा भी नहीं है क्योंकि कोई भी अपनी एज बढ़ाकर लिख सकता है। पर सवाल ये उठता है की आप कितने सेफ हो। कुछ पेरेंट्स जो जानकर भी अपने बच्चे को फेसबुक अकाउंट बनाने की परमीशन दे देते हंै पर यह नहीं देखते की बच्चा उसका कैसा इस्तेमाल कर रहा है, किसको ऐड कर रहा है, किससे चैट कर रहा है। मैं बात सिर्फ फेसबुक की ही नहीं, आज यू ट्यूब भी खतरे से खाली नहीं है। कोई कैसे उसका इस्तेमाल कर रहा है, उसकी कोई जानकारी आपतक नहीं पहुच पाएगी और आप रियलिटी में बेखबर रहेंगे। आज कल की जेनरेशन इतनी आगे बढ़ चुकी है की आप सिर्फ सोचते रहेंगे और कोई भी बच्चा वो काम फटाक से कर के दिखा देगा।  यहाँ तक की 6-7 साल के बच्चो को हिस्ट्री क्लियर करना भी बहुत आराम से आता है। मेरा यह मतलब नहीं कि इन्टरनेट पूरी तरह से यूजलेस है। इन्टरनेट पर आप बहुत सी इनफार्मेशन, जैसे अपनी अर्थ के बारे में, अपनी आगे की एजुकेशन के लिए टिप्स भी सर्च कर सकते हो। बट शायद छोटे बच्चों को सिर्फ सोशल नेटवर्किंग साइट्स के बारे में सबसे ज्यादा पता होता है और वो बहुत जल्दी इसकी तरफ अपना ध्यान लगा देते हैं जो उनकी लाइफ के लिए और इवन उनकी हेल्थ के लिए भी ठीक नहीं है। अगर कोई भी पैरेंट अपने बच्चे को ज्यादा एफबी यूज करने के लिए मना करता है तो बच्चो को इतना तेज़ गुस्सा आता है कि वो भूल जाते हैं की हम अपने बड़ों से बात कर रहे हैं। वो बच्चे ये भी नहीं समझ पाते की हम क्या बोल रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है की फेसबुक आई.डी बनाना इतना आसान है कि कोई भी आराम से बना सकता है। फटाफट आपकी आईडी बनकर तैयार हो जायेगी। वेब डेवलपर्स को चाहिए की इस स्टेप को और मुश्किल किया जाए ताकि छोटे बच्चे इससे बच सकें और उनकी लिए में इससे रिलेटेड कोई प्रॉब्लम न आ सके।

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...