Friday, 14 November 2014

क्या यही है बाल दिवस??

आज चिल्ड्रेन्स डे है हर बच्चा ख़ुशी ख़ुशी स्कूल की तरफ जा रहा है। कलरफुल ड्रेस में हाथ में गुलाब लेकर हर बच्चे के चेहरे पर बड़ी सी स्माइल है। स्कूल जाकर दो घंटे का रिसेस ब्रेक पूरा दिन ग्राउंड में क्रिकेट, बैडमिंटन, ऑडिटोरियम में एक्स्ट्रा कलिकुलर एक्टिविटीज कोई रोक टोक नहीं। टीचर्स के साथ प्यारी प्यारी पिक्स और उसके बाद घर। कितना प्यारा शेड्यूल है। इसे सोचकर तो ऐसा लग रहा है कि काश हम फिर से बच्चे बन जाएं।
पर टीवी देखकर के मन फिर से खराब हो गया चाइल्ड लेबर की कुछ फोटो टीवी पर दिखाई गयीं जिसपर बच्चों को भूखा प्यासा फुटपाथ पर मारा जाता है और सुबह ज़बरदस्ती उठाकर धंधे में लगा दिया जाता है । ठण्ड में ढंग के कपडे भी नहीं और भूखे बच्चे ज़बरदस्ती काम या धंधे में ठेले जाते हैं और अगर गलती से भी कोई काम गलत हो या कोई चीज़ गलती से भी टूट जाए तो उनको फिजिकली  और मेंटली टार्चर किया जाता है। जिससे उनके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है। प्लस काम के बदले में उन्हें न तो कपडे ढंग के मिल पाते हैं और न ठण्ड की रात गुज़ारने के लिए जगह। इंडिया में लगभग 27 लाख बच्चे चाइल्ड लेबर का शिकार हैं । यहाँ उन बच्चों को काम दिया जाता है जिनके पेरेंट्स ने ओनर से कर्र्ज ले रखा हो या उन बच्चो को गिरवी रखा गया हो।
मैं बात सिर्फ बाल मजदूरी की ही नहीं कर रही हूँ , मैं उन बच्चों की भी बात कर रही हूँ जो स्टूडेंट्स हैं पर उनका मिडिल क्लास या लोअर मिडिल क्लास का होने की वजह से उन्हें भी रोज़ इस मेंटल और फिजिकल टार्चर से गुजऱना पड़ता है। अभी कल ही टीवी में देखा एक छोटा सा 12 साल का बच्चा बीमार होने की वजह से स्कूल नहीं आ पाया तो टीचर उसे पहले प्रिंसिपल के पास ले गए । उन्होंने उसे प्यार से समझाने के बजाये लोहे की रॉड से इतना मारा की उसके हाथ पैर नीले हो गए और फिर जब वो बच्चा क्लास पंहुचा तो क्लास टीचर ने भी उसे लकड़ी के स्केल से इतना मारा की बच्चा वहीं बेहोश हो गया और उसे ये भी धमकी मिली की खबरदार घर में जाकर कुछ बताया, मैं तुम्हारे माँ बाप से नहीं डरता हूँ....उसके बाद वो बच्चा  इतना ज्यादा डर गया की उसने ऐसा कदम उठाया की आज वो बच्चा हमारे बीच नहीं है । पर पेपर पर उसने उन टीचर्स के नाम लिखे जिन्होंने उस बच्चे को एब्यूज किया अब देखते हैं उन घटिया मेंटालिटी के टीचर्स को इसकी क्या सजा मिलती है । और अब आपको आगे आने की ज़रुरत है ताकि बच्चा अपने पेरेन्ट्स से अपनी परेशानी शेयर कर सके और उसे इतना मेंटल टार्चर न झोलना पड़े। अब आप पूरा दिन अपने आप से पूछिए की क्या यही है बाल दिवस?
तेजस्विनी ओझा उपमन्‍
यु

Saturday, 8 November 2014

मुझे झाड़ू लगाते टीवी पर देखा क्या?


आज कल पूरे देश में सफाई अभियान ज़ोर शोर से चल रहा है। हमारे ऑनरेबल पीएम अंकल ने भी काफी देर तक झाडू लगाईं थी सडक़ों पर। अगर आप
देखें तो टीवी और रेडियो पर भी साफ़ सफाई की मुहिम छिड़ी हुयी है। हर कोई अपने आसपास सफाई रखने पर जोर दे रहा है। हमारे देश के कुछ क्रिकेट के चैंपियंस तो सुबह 4 बजे उठकर सफाई कर रहे हैं। और तो और जिन एक्टर्स और एक्ट्रेसेस को हमलोग सेल्फ सेंटर्ड कहते हैं वो भी अपने इंडिया
की सफाई के लिए आगे आ रहे हैं । चाहे कोई भी हो, पोलिटिकल पार्टीज के नेताओं
के हाथ में भी आपको झाडू दिखेगा। पर शायद कुछ लोग ऐसे हैं जो एक ही जगह
बार बार घूम घूम के झाडू लगा रहे हैं और कुछ तो ऐसे हैं की जहां भी कैमरा
दिखे वहां अपनी झाडू लिए शुरू हो जाते हैं। अभी कुछ ही दिनों पहले टीवी पर
देखा कि दो लोग टीवी पर आने के लिए झाडू लगा रहे थे । इसी बीच उन
दोनों में लड़ाई हो गयी और अपनी अपनी झाडू उठाकर लडऩे लगे। उन्हें ये
नहीं पता था की यही लड़ाई टीवी पर आ जायेगी और वो हंसी के पात्र बन जाएंगे।
आप ही सोचिये की ये तो कोई सफाई नहीं हुयी जबकि आप टीवी पर आने के
लिए ऑलरेडी साफ़ जगहों पर झाडू लगा रहे हो।  ये लोग तो सिर्फ अपनी
पब्लिसिटी करने के लिए ही साफ़ जगहों पर झाडू लगा रहे हैं(जो जनता को दिख
भी रहा होता है)। हद तो तब हो जाती है जब दो गुटों में टीवी पर आने की
उत्सुकता की वजह से जूते चप्पल चल जाते हैं । और वो खबर सीधे टीवी में
ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाती हैं। पर ये क्या बात हुयी आपका इरादा तो टीवी पर आने का था वो पूरा तो हो जाता है पर जिन लोगों से आप अपनी तारीफ़ कराना चाहते हो वो लोग आप पर उल्टा हाथ दिखाकर हँसना शुरू कर देते हैं।
अब आप ही बताइये की क्या ऐसे हम अपनी कंट्री को सुधार सकते हैं? क्या इन
छोटी छोटी बातों पर लाठी डंडे या जूते चप्पल चला कर हम अपनी कंट्री को
साफ़ कर पाएंगे? क्या हमारी अपनी आस पास गंदगी फैलाने की मानसिकता कभी
बदल पाएगी? पर चलिए हमारे देश में कुछ ऐसे भी लोग
हैं जिनको अपने आस पास कैमरा न होने से कोई फर्क भी नहीं पड़ता। वो सिर्फ
अपनी कंट्री को साफ़ देखना चाहते हैं और ये विश ज़रूर पूरी होगी उनकी अगर
पूरी कंट्री उनका साथ दे तो।...तबतक आप थोडा झाडू लगाइए पर ये मत बोलिएगा
की मुझे झाडू लगाते टीवी पे देखा क्या ?

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...