
काफी दिनों बाद अपने लैपटॉप पर अपने प्यारा पुराने डोंगल वाला डाटा कार्ड लगा देखा तो लगा की क्या यही वो डाटा कार्ड है जिसके लिए मेरे घर में मारा मारी मची रहती थी. क्या यह वही डाटा कार्ड है जिसे हमलोग ईपेपर पढऩे का बहाना बनाकर ले जाते थे और धीरे से दूसरी विंडो खोलकर फेसबुक और जीमेल खोला में चैटिंग वैटिंग करते थे. पर अब शायद अब टाइम बहुत तेज़ी से आगे निकल रहा है देखते देखते हम सबके पास अपने अपने स्मार्ट फोंस आ गए हैं. उसके सिम में डाटा वैलिडिटी डलवाकर नेट ऑन कर लेते हैं और आपकी वेब की दुनिया धकाधक आपके इशारों पर नाचती है। वाई-फाई ने भी डाटा कार्ड की पॉपुलैरिटी को काफी कम कर दिया है. डाटा कार्ड तो क्या अब लैपटॉप को भी हाथ नहीं लगाया जाता क्योंकि लैपटॉप खोलते ही वो स्टार्टिंग विंडोज की स्क्रीन के खुलने का आइम हमारा हाड़ जला देता है. स्मार्ट फोंस में तो क्या बस जिग़-ज़ैग पासवर्ड बनाया नेट कनेक्ट किया और हो गया स्यापा ख़तम. बेचारा लैपटॉप और डाटा कार्ड पड़े पड़े धूल खाते रहते हैं. स्मार्ट फ़ोन में तो अगर कभी डाटा भी ख़तम हो जाता है तो कोई टेंशन की बात नहीं होती बस नंबर घुमाया और कर लिया डाटा रिचार्ज। कल पता नहीं क्या हुआ अपने लैपटॉप और डाटा कार्ड को ऐंवई पड़ा देखकर थोडा खराब लगा. मुझे अपने घर में डाटा कार्ड की खीच तान को लेकर होने वाली महाभारत याद आने लगी. अब तो कोई बेचारे दोंगल को पूछता भी नहीं. सब अपने आईपैड और आई फ़ोन में लगे हैं. लैपटॉप और डोंगल एक कोने पड़े धूल खा रहें हैं. लैपटॉप यूज भी करते हैं तो वाई-फाई से। कहीं भी किसी के भी घर जाकर पहले नमस्ते-नमस्ते होता है फिर बत्तीसी दिखाकर ये पूछ ही लेते हैं की भाई साहब एक ज़रूरी मेल काना है
प्लीज अपने वाई फाई का पासवोर्ड बता दीजिये. चाहे सच्चाई कुछ और ही हो. पता नहीं अपने लैपटॉप और डोंगल को देखकर ऐसी फीलिंज्स सिर्फ मुझे ही हो रहा है या आपको भी ऐसी ही फीलिंज्स आती हैं या नहीं? क्योंकि डोंगल गया अब है वाई-फाई का जमाना.
