Thursday, 8 September 2016

क्या शिन्चैन भी इतना उदास था??


‘शिनचैन नोहारा’’ ये नाम सुनकर आ गयी ना आपके चेहरे पर मुस्कान जी हाँ!! ये वही कार्टून है जिसे आप और हम मिलकर देखते हैं और हँस-हँस के लोट-पोट हो जाते हैं खूब सारी  बदमाशी करने वाला, रोज़ कोई न कोई स्यापा खड़ा करने वाला फूले गाल वाला वो प्यारा सा बच्चा.. उसकी मम्मी मित्सी नोहारा, पापा
हैरी नोहारा बेहेन हिमावारी नोहारा. ये सब हम सबको रोज़ खूब हंसाते हैं. पर क्या आपको पता है शिन्चैन की इस कहानी के पीछे एक बहुत दुखद और आखों में आंसू ला देने वाली कहानी है. जी हाँ!! शिन्चैन एक कार्टून करैक्टर ही नही  बल्कि सच का एक इंसान था. 

चौंक गये ना आज हम आपको बताते हैं शिनचैन की रियल स्टोरी, शिनचैन का असली नाम सिन्नोसूके नोहारा था जिसकी जान अपनी
बेहेन को कार एक्सीडेंट में बचाते-बचाते चली गयी थी. इस से सिन्नोसूके के माँ मिसाए इतनी ज्यादा दुखी हुयीं की उन्होंने एक सुखद अंत वाली एक बुक लिखने की शुरुआत की. इनकी बुक पढ़कर योषिता उसल ने शिनचैन नाम का एक कार्टून बनाया जिसपर आज सब लोग ताली पीट-पीट के हँसते हैं. 
आज जब मेरे वॉट्स एप्प पर ये मेसेज आया तब हमने मन में सोचा की सच में शिनचैन की इस प्यारी सी मुस्कान के बहुत पीछे इतना सारा दर्द छुपा है. ये पढ़कर शायद आप थोड़ी देर के लिए उदास होंगे पर फिर नार्मल हो जायेंगे पर उस माँ का दर्द सोचिये जिसने अपने दोनों बच्चों को खो दिया
फिर भी इतनी अच्छी और पॉजिटिव किताब लिखी जिसे योषिता ने इतने प्यारे ढंग के कार्टून के ज़रिये हमारे सामने पेश किया. 

मैं आज भी शिनचैन देखती हूँ जब मैं घर वापस आती हूँ तो शिनचैन की तरह ‘वेलकम बैक’’ कहती हूँ और शिनचैन की मम्मा की तरह मेरी मम्मा भी कहती हैं ‘ओह हो बेटा आय ऍम बैक होता है’ और आज ये मेसेज पढने के बाद मुझे तो शिनचैन से और भी ज्यादा लगाव हो गया है, मैं तो चली शिनचैन देखने और आप?
                              -तेजस्विनी ओझा.

Journey of a happy life...!!!!

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