आज मेरी खिड़की पर आ बैठी एक चिड़िया,
मैंने पूछा कैसे बनता है तेरा आशियाना,
बोली होना है मुश्किल बनाना ,
जोड़ती हूँ मैं तिनका-तिनका पड़ता है खाना लाना,
कभी कभी बच्चे खेल में तोड़ देते हैं मेरा ठिकाना।
रात होती ही काँप उठती हूँ मैं डर से,
आती है आवाज़ें उसकी(उल्लू की) न जाने कहाँ से,
फिर सुबह होती है नए उजाले के साथ ,
फिर हवा बतियाने लगती है मेरे साथ -साथ ,
जुड़ती है मेरी हर ख़ुशी तिनके के साथ साथ।
-- तेजस्विनी तमन्ना ओझा।
मैंने पूछा कैसे बनता है तेरा आशियाना,
बोली होना है मुश्किल बनाना ,
जोड़ती हूँ मैं तिनका-तिनका पड़ता है खाना लाना,
कभी कभी बच्चे खेल में तोड़ देते हैं मेरा ठिकाना।
रात होती ही काँप उठती हूँ मैं डर से,
आती है आवाज़ें उसकी(उल्लू की) न जाने कहाँ से,
फिर सुबह होती है नए उजाले के साथ ,
फिर हवा बतियाने लगती है मेरे साथ -साथ ,
जुड़ती है मेरी हर ख़ुशी तिनके के साथ साथ।
-- तेजस्विनी तमन्ना ओझा।
