Monday, 14 July 2014

मशीनों की दादागीरी

आज के ज़माने में टेक्नालॉजी काफी एडवांस हो गयी है। जैसे टाइप करने के लिए टाइपराइटर या क्म्प्यूटर। लैपटॉप्स पर ज्यादा से ज्यादा ऑफिशियल काम निपट जाते हैं, पर पहले के ज़माने में हाथ से लिखना पड़ता था। बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में भी बड़ी बड़ी मशीनों की ज़रूरत पड़ती है। आपने एक बात पर ध्यान दिया है कि मशीनों की वजह से मजदूर बेरोजगार हो रहे हैं क्योंकि एक मशीन सौ मजदूरों का काम कर रही है। उनकी हाथ की मेहनत को तो मशीनों ने हड़प लिया अब बेचारे मजदूर क्या करें। जो काम हो 2 दिन में करते थे मशीनों ने वो काम आधे दिन में ही पूरा कर दिया तो ठेकेदारों ने मजदूरों को की छटनी कर दी।  अब बेचारे जाए तो जाएँ कहाँ। फुल ऑन

वाट लगा दी है मशीनों ने। इसलिए बेचारे गलत काम कर रहे हैं ताकि दो वक्त की रोटी खा सकें। पर कर भी क्या सकते हैं सारा काम तो मशीने ही कर देती हैं। एक समय तो ऐसा आएगा जब बिल्डिंग बनाने का सारा काम भी मशीने करेंगी। और बेचारे मजदूर हाथ मलते रह जाएंग। सिर्फ मजदूर ही नहीं हम भी मशीनों पर पूरी तरह डिपेंडेंट हो गए हैं। आँख खुलते ही सबसे पहले मशीनों का दर्शन होता है । सारा दिन मशीनों पर ही शुरू होता है और उसपर ही ख़तम होता है...अपनी मेहनत से काम ही नहीं करते गेहूं पीसने के लिए मशीन का इस्तेमाल, चि_ी पोस्ट बॉक्स में डालने से अच्छा  है कि मेल कर दो। सारा झंझट ही ख़तम। मुझे पता है कि मशीने हमारी काफी हेल्प करती हैं बट उनपर पूरी तरह डिपेंडेंट रहना ठीक नहीं है। इसके कुछ पॉजिटिव और कुछ नेगेटिव इफेक्ट्स होते है जो आप ही सोचकर मुझे बताइये पर मेरे हिसाब से 50 परसेंट पॉजिटिव और 50 परसेंट नेगेटिव इफेक्ट्स हमारे सामने मौजूद हैं पर ये आपको ही समझना पड़ेगा की क्या नेगेटिव हैं और क्या पॉजिटिव...तब तक  चलाते रहिए मशीन..

3 comments:

rajiv said...

Lekin Machine ko banate to ham hi hain... :-)

rajiv said...

Lekin Machine ko banate to ham hi hain... :-)

rajiv said...

Lekin Machine ko banate to ham hi hain... :-)

Journey of a happy life...!!!!

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