Tuesday, 2 December 2014

बेटा पढ़ के सीधे घर आना

हर बच्चे की मां उसे स्कूल भेजने से पहले यही बोलती है की  बेटा स्कूल में अच्छे से पढ़ाई करना और उसके बाद सीधा घर आना। पर उसे क्या पता है की जो बच्चे के लिए वो अपना खून पसीना एक करके पैसे जोड़ रही है, सुबह जल्दी उठकर उसके लिए लंच तैयार कर रही है, बच्चों को किसी चीज़ की कमी  न हो, उसके लिए दिन रात ऑफिस में ख़ट रही है, वही बच्चा स्कूल बंक करके गलत रास्ते पर जा रहा है । क्या कभी एक मां ये बिलीव कर सकती है कि उसका बेटा या बेटी स्कूल टाइम में बाहर घूम रहे हैं। कल की ही बात है किसी काम से मुझे हजरतगंज जाना पड़ा तो देखा चार पांच स्टूडेंट्स जो 10 या 11 साल के होंगे, स्कूल ड्रेस में सिनेमा हॉल के बाहर मस्ती कर रहे हैं और स्मोकिंग कर रहे हंै। सामने पुलिस खड़ी है पर उनके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं है। इस एज में आकर स्टूडेंट्स को लगता है की पेरेंट्स हमे नहीं समझते हम जो भी कर रहे हैं वो ही सही है बाकी सारी दुनिया उनकी दुश्मन है। अब आप ही इमेजिन करिये की पेरेंट्स को लगता है कि उनका बेटा स्कूल जाकर अच्छे से पढ़ाई कर रहा है अपने टीचर्स की रिस्पेक्ट कर रहा है। वही बच्चा अपने पेरेंट्स की सोच से उल्टा ही काम कर रहा होता है। मैं बात सिर्फ बंक करने वाले स्टूडेंट्स की ही नहीं कर रही। स्कूल में भी स्टूडेंट्स अपने टीचर्स को परेशान करते हैं। टीचर पढ़ाने क्लास में आते हैं तो पूरी क्लास ही खाली मिलती है। टीचर्स के पढ़ाते वक्त बच्चे आवाज़ निकालकर टीचर्स और पढऩे वाले बच्चों का कंसंट्रेशन तोड़ते हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो स्टूडेंट फेल हो जाएंगे और उनका करियर पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। स्कूल के प्रिंसिपल भी इन बातों को अपनी मजबूरी बताते हैं। बच्चा स्कूल में मोबाइल ला रहा है , टीचर्स के फंकी वीडियो बना के नेट पर वायरल कर रहे हैं तो ऐसे स्टूडेंट्स को पटरी पर लाना काफी मुश्किल होगा।
पेरेंट्स को चाहिए की वो अपने बच्चे की हर एक्टिविटी पर ध्यान रखें। आई नो की पेरेंट्स के पास इतना समय नहीं होता है कि वो बच्चों पर ध्यान दें पर थोड़ा सा ध्यान देने की बात है तो सब नॉर्मल हो सकता है। रही टीचर्स और प्रिंसिपल की बात, तो अगर बच्चा 3 दिन से ज्यादा की छुट्टी लेता है तो वो तुरंत स्टूडेंट के पेरेंट्स को कॉल करें पुलिस भी ध्यान रखे कि अगर बच्चा स्कूल टाइम में बाहर घूमता हुआ मिले तो तुरंत प्रिंसिपल को या उस बच्चे के पेरेंट्स को बताएं बट तबतक इस भयंकर सिचुएशन का क्या होगा ये सोचने वाली बात होगी.

1 comment:

rajiv said...

Agar sab bachche itane samjhdaar ho jaye to perents ka sara tension hi khtm ho jaye..very well written..

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...