Tuesday, 23 December 2014

तू नाकारा फिर भी हीरो!!!

               


आज कल के यूथ में आगे बढ़ने की होड़ मची हुयी है. हर कोई आगे बढ़ना चाहता है कोई भी किसी से कम नहीं है. चाहे वो आपका बेस्ट फ्रेंड ही क्यों न हो, उसके मन में एक सेकंड के लिए ये तो आता ही है की वो अपने फ्रेंड से आगे निकल सके. किसी भी हालत में ऐसी सिचुएशन में एक फिल्म का डायलाग याद आ जाता है- ‘दोस्त फेल होता है तो दुःख होता है पर अगर दोस्त टॉप कर जाए तो उससे भी ज्यादा दुःख होता है’’. यह सभी यूथ का हाल है. पर कभी कभी आपके पेरेंट्स की ऊँची पहुच भी आपको आपकी लाइफ में वो सब कुछ दिला देती है जो शायद आप संभाल नहीं सकते या शायद जो आप डिज़र्व नहीं करते. अगर पेरेंट्स एक बार ये सोच लेते हैं की भाई मेरा पुत्र या पुत्री तो डॉक्टर या इंजिनियर ही बनेगा बस पर एक बार भी अपने बच्चे की सलाह लेना ज़रूरी नहीं समझते. अगर वो बच्चा कोई एक्शन भी लेना चाहे तो उसे डाट कर चुप करा दिया जाता है और उन पेरेंट्स में तो एक धुन सी लग जाती है और उसके लिए वो अपने आप को पूरा कंगाल करने के लिए भी तैयार हो जाते हैं. पर क्या स्टूडेंट्स उस कोर्स को पूरा करने में सफल होते हैं? शायद नहीं पर पेरेंट्स की पहुंच और ऊपर से जूनून है तो क्या-क्या नहीं कर सकते हैं. अपने बच्चो के लिए कुछ करप्ट प्रिंसिपल्स और एचओडी इसका फायदा उठाकर और उन पेरेंट्स से बड़ी रकम लेकर स्टूडेंट के आगे के इयर्स को सिक्योर करने का भरोसा दे देते हैं... और जो बच्चे घिसट कर किसी तरह पास भी हो जाते हैं उनके पेरेंट्स ये चाहने लगते हैं की मेरा बच्चा टॉप करे और उसके लिए डायरेक्टर की जेब में लाखों करोड़ों भरकर अपने बच्चे को टॉप पे ले आते हैं पर क्या लांग रन में वो बच्चे सक्सेस अचीव कर पाते हैं! शायद नहीं और अपनी पूरी लाइफ में फेलियर की भूमिका अदा करते हैं...और जो मिडिल या लोअर क्लास के बच्चे होते हैं पढने में तेज़ इंटेलीजेंट और डेसेर्विंग और सब कुछ पर शायद उनकी जगह वो अनडिसेर्विंग बच्चे ले लेते हैं और उन बेचारे स्टूडेंट्स को फेल कर दिया जाता है जिसने टॉप करने के लिए अपनी जी जान लगा दी थी...ये धांधली मेडिकल फ़ील्ड में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है. पेरेंट्स अपने बच्चे को टॉप में लाने के लिए घूस हैं और जो डेसेर्विंग बच्चा होता है वो फेल हो जाता है. अब ये उन पेरेंट्स की सोच पर डिपेंड करता है की वो अपने बच्चे को सच का हीरो बनाना चाहते हैं या नाकारा हीरो...सो थिंक पेरेंट्स...      

1 comment:

rajiv said...

जब पढ़ाई की दुकान गली गली खुल जाएंगी तो यही होगा। टीचर भी अब बिजनेसमैन बन गए हैं

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...