Wednesday, 20 May 2015

जीना इसी का नाम है


कभी कभी लगता है की हम सब अपने लाइफ की भागा-दौड़ी में इतने बिजी हो जाते हैं की अपने आस पास की ब्यूटीफुल चीज़ों को भी नहीं पहचान पाते। कल की ही बात है गर्मी बहुत थी पापा के साथ प्लान बना की बाहर घूम आया जाए नरही की ही एक पॉपुलर लस्सी की दूकान में रुके तो देखा चार-पांच साल की  छोटी सी एक लडक़ी भी लस्सी का मज़ा लेने दूकान पर अकेले आई। ये देखकर थोड़ा डर सा लगा क्योंकि वो बच्ची अकेली थी। उसके साथ कोई नहीं था। यह सोचकर रुक गए की शायद बगल के दुकानदार की बेटी होगी। उसने अंकल को अपने नन्हें नन्हें हाथों से पैसे दिए और हमारे सामने वाली टेबल पर आकर बैठ गयी। हमने उससे भौंह उचकाकर हेल्लो किया तो बड़ी ध्यान से मुझे देखने लगी। शायद उसके मन में सवाल उठ रहा था की क्या मैं इनको जानती हूँ पर उसने सिर्फ एक छोटी सी हंसी से ही काम चलाया। पूरी टेबल पर फुदक फुदक कर इधर उधर देख रही थी। कभी इस कोने में कभी उस कोने में। तभी लस्सी वाले अंकल आये और उसको एक गिलास में लस्सी दी। पहले तो कुछ सेकंड्स के लिए उसने लस्सी को ध्यान से देखा फिर पहला सिप लिया। तबतक हमारे लिए भी लस्सी की गिलास सामने आ गयी। उसने मेरी गिलास देखकर मेरी तरह अपनी नजऱें दौड़ाई और फिर वही प्यारी सी स्माइल दी। छोटे छोटे प्यारे प्यारे हाथों में गिलास देखकर शायद हम अपनी साड़ी थकान भूल चुके थे। एक हाथ में भगवान् का कलावा और दूसरे हाथ में कड़ा और प्यारी प्यारी आखें एक तरफ तो लस्सी की मीठी मीठी घूँट तो दूसरी तरफ उसकी प्यारी प्यारी आखें जो मेरे तरफ बार बार मुड रही थीं। जब उसकी लस्सी ख़तम हुई तो उसने एक लंबी सांस ली। शायद लस्सी ने उसको गर्मी से थोड़ी सी राहत दी फ़ौरन बेंच से उतरी गिलास डस्टबिन में फेंका और फिर मेरी तरफ मुड़ी शायद वो कहना चाह रही थी की चलिए हो सकता है हम दुबारा मिलें। इसके बाद कूदती फांदती हुई वो चली गयी। जब हम भी दूकान से लौट रहे थे तो मुझे लगा की इन बच्चों की आखों में जो इनोसेंस है । वो शायद हमारे अन्दर कहीं दब गया है । हम जैसे ही बड़े होते हैं हमारे अन्दर सेल्फिशनेस आ जाती है। वो मासूमियत या कह सकते हैं वो इनोसेंस कहीं खो चुकी होती है। पर चलिए ये देखकर तो अच्छा लगा की लाइफ के कुछ पल या दिन तो हम बिना स्वार्थ के और बिना किसी टेंशन के बिता ही सकते हैं। कल उस बच्ची को देखकर पापा की एक लाइन इसमें सटीक बैठती हुयी दिख गयी की रियली

लाइफ इज़ ब्यूटीफुल कोई शक?

1 comment:

rajiv said...

वह क्या आब्जरवेशन है कमाल का :-)

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...