Thursday, 23 July 2015

काश..! मौसम की तरह हम भी हो जाएं


 पिछले दिनों में गर्मी इतनी भयंकर थी की उठ कर मूड ऑफ हो जाता था.....लगता का की क्या यार आज फिर वही चिप-चिप वाली गर्मी और जो काम हम मन लगाकर करते हैं वो काम हमे भारी सा लगने लगता है। रात में शायद थोड़ा मौसम ठीक हो जाता हो पर हम इतनी गहरी नींद में होते हैं कि कुछ पता ही नहीं चलता। और जब कभी भी मौसम अच्छा और रेफ्रेशिंग होता है तो काम में हमारा मन आटोमेटिकली लग जाता है और हम फ़ौरन जुट जाते हैं। ये सोचने वाली बात है की  मौसम से कितने हद तक हमारा मन कनेक्टेड रहता है। अगर अच्छा रहे तो बल्ले बल्ले नहीं तो पसीने से जूझता हुआ हमारा चेहरा।
जब मौसम की बात हो रही है तो एक बात दिमाग में आई कि जिस तरह से हम मौसम से आटोमेटिकली कनेक्टेड रहते हैं वैसे ही अगर हमारा मन भी लोगों के साथ कनेक्ट हो सके तो कितने अच्छी तरह से हम लाइफ को इंजॉय कर सकते हैं । ये आज कल के लोगों के बिहेवियर में देखा जाता है जब उनको आपकी हेल्प की ज़रूरत पड़ती है तो वो आपके पीछे-पीछे घूमेंगे और जब काम निकल आया तो आपको भूल कर अपने ठाट बाट पर ध्यान देंगे। आपको एक बार भी ये नहीं पूछेंगे की आप कैसे हैं? यहाँ पर अपने स्वार्थ में जीने की हर दूसरे आदमी की आदत सी बन गयी है। दूसरी हद तो ये ऊँच-नीच के लोगों के बीच फरक होना है। ऊँचे ओहदे के लोग तो ठाट में पूरा दिन ऐसी में पड़े पड़े बिता देते हैं और जो गरीब होते हैं पूरा दिन काम करने के बाद जब फुटपाथ पर सोते हैं तो उनको ये भी भरोसा नहीं रहता की पता नहीं कल का दिन देख भी पायेंगे की नहीं क्योंकि शराब पीकर कुछ रईसजादे इनपर गाड़ी चढ़ा देते हैं । कोई पुलिस कंप्लेंन कर भी दे तो बड़ी जल्दी इनको राहत भी मिल जाती है। सोच सोच के कई बार लगता है की मौसम भी कितना लॉयल है की सबपर अपना कहर भी बरपाता है और सबपर अपनी हवा और बारिश की बूंदों को भी बरसाता है। काश इसी तरह ह्यूमन भी अपने आप को ढाल ले तो लाइफ तो हर हाल में ब्यूटीफुल बन ही जाएगी पर कब तक इंसान को ये बात फील होती है ये सोचने वाली बात होगी.

1 comment:

rajiv said...

Bahut achcha Lilkhaख़ूब लिखो

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...