Sunday, 10 July 2016

टेक केयर जेरी


यह सिर्फ आर्टिकल ही नही है इससे मेरे इमोशंस भी जुड़े हुए हैं। मैं सो रही थी अचानक मम्मी की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी चुन-चुन उठो बेटा  बाज़ार चलना है जल्दी करो नही तो अँधेरा हो जाएगा मैं ऊंघते हुए उठी फटा फट तैयार हुयी । जैसे ही दरवाज़ा खुला बड़ी तेज़ एक छोटी सी प्यारी सी भागती हुयी चीज़ मेरी घर में घुस गयी । उस समय तो ध्यान नहीं गया और जब शॉपिंग कर के लौटे तब तक मेरे दिमाग से बात निकल चुकी थी। अचानक से मम्मी की आवाज़ आई मैं कंप्यूटर पर बैठी थी। मम्मी बोलीं चुन चुन घर में गिलहरी घुस आई है। मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी मैंने सोचा अब क्या होगा। फिर रात हुयी हमलोगों ने खाना खाया और सो गये अगले दिन जैसे ही सुबह मैंने पर्दा खोला तो देखा एक छोटी सी प्यारी सी गिलहरी मेरे शीशे पर बैठी हुयी थी। पर मुझे देखकर ही वो भाग गयी तब मुझे यकीन हुआ की हाँ मेरे घर में एक प्यारी सी गिल्लू घुस आई है । 
यकीन मानिए मेरे ख़ुशी का ठिकाना नही रहा, मैं इतनी खुश थी की एक छोटे से प्लास्टिक के ढक्कन में उसके लिए पानी रखा और कुछ बिस्किट्स भी.. दोपहर में खाना खाते टाइम मेरी नजऱ किचेन की तरह गयी तो मैंने देखा की जेरी अपना थोडा सा सर निकाल के मेरी तरफ देख रही थी मुझे लगा शायद भूख्ी होगी मैंने जाकर उसे एक रोटी का टुकडा दे दिया। मुझे देखकर तो वो भाग गयी पर जैसे ही किचेन से निकलकर मैंने पीछे मुड कर देखा तो जेरी अपने दोनों हाथों से आराम से बैठकर रोटी खा रही थी। मैंने ख़ुशी के मारे मम्मी को भी दिखाया... फिर शाम को भी जेरी मुझे खिडक़ी पर मिली पर ये क्या? मुझे उसका चेहरा देख कर लगा शायद जेरी खुश नही है उदास है । घर में उसका दम घुट रहा है वो परेशान रहने लगी यहाँ तक की हमलोगों से डरने भी लगी। चुप चाप बाहर की बाकी गिलहरियों को देखती हुयी.. हमारा घर फ्लैट है खुली जगह की कमी होने की वजह से शायद जेरी को घबराहट हो रही थी। मुझसे ये नहीं देखा गया मैंने मम्मी से कहा मम्मा जेरी डरी हुयी सी लग रही है वो घबराई हुयी है। मम्मी ने बोला हाँ बेटा  मुझे भी ऐसा ही लग रहा है हमलोगों ने सोचा की मेन डोर खोल देते हैं शायद जेरी बाहर निकल जाए और दरवाज़े के पीछे बने लॉबी में कुर्सी लगा के बैठ गये पर जेरी इतना डरी हुयी थी थोड़ी देर के लिए बाहर निकली भी तो मेन डोर की तरफ जाने के बजाये वो मेरे रूम की तरफ चली गयी। मम्मी बोलीं की इसे निकालने तो बहुत मुश्किल है । जेरी सहमी सहमी रहने लगी अब तो ठीक से खाना भी वो बंद कर चुकी थी । 
मुझे डर था की कहीं जेरी बीमार का पड जाए अब मुझे भी जेरी की चिंता होने लगी थी फिर हमलोगों ने एक प्लान बनाया । वो प्लान ये था की मेन डोर खोल के हमलोग काफी दूर बैठ जायेंगे जिससे जेरी बिना डरे निकल सके । दोपहर हुयी मैं सोने चली गयी गहरी नींद में जब उठी तो मम्मा टीवी देख रहीं थी बोली चुनचुन जेरी चली गयी। मुझे एक पल के लिए तो विश्वास ही नहीं हुआ।  तब मम्मी ने मुझे पूरी बात बतायी की जेरी किस तरह से नजऱें बचाते हुए निकल गयी। 
मुझे एक पल के लिए लगा जेरी क्यों चली गयी पर फिर कुछ देर बाद फील हुआ की नहीं यहाँ जेरी परेशान थी डरी हुयी थी अब वो अपनी फॅमिली के पास है खुश होगी, पेड़ से आम खा रही होगी उछल रही होगी कूद रही होगी खुश होगी.. मेरे मुंह से निकला भगवान करे जेरी जहां भी रहे सेफ रहे खुश रहे.।  शाम को ये सब पापा को बताया तो उन्होंने कहा बेटा उदास मत हो जेरी कुछ दिनों के लिए आई थी उसको तो जाना ही था और वो खुश होगी अपने फैमिली के पास तुम परेशान मत हो जेरी तुम्हें ज़रूर याद रखेगी। इस पर मेरे मुंह से निकला- टेक केयर जेरी, आई विल मिस यू..

2 comments:

RUPESH said...

good work keep it up

Anonymous said...

Thank you Rupesh.. :)

Journey of a happy life...!!!!

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