Sunday, 26 February 2017

उसका आशियाना

आज मेरी खिड़की पर आ बैठी एक चिड़िया,
मैंने पूछा कैसे बनता है तेरा आशियाना,
बोली होना है मुश्किल बनाना ,
जोड़ती हूँ मैं तिनका-तिनका पड़ता है खाना लाना,
कभी कभी बच्चे खेल में तोड़ देते हैं मेरा ठिकाना।
रात होती ही काँप उठती हूँ मैं डर से,
आती है आवाज़ें उसकी(उल्लू की) न जाने कहाँ से,
फिर सुबह होती है नए उजाले के साथ ,
फिर हवा बतियाने लगती है मेरे साथ -साथ ,
जुड़ती है मेरी हर ख़ुशी तिनके के साथ साथ।
  -- तेजस्विनी तमन्ना ओझा।

4 comments:

rajiv said...

Wah kitani shaandar lines hain. isme beti bachao aur pakshi bachao ka sandesh bhi hai... Great

Nitin sharma said...
This comment has been removed by the author.
Nitin sharma said...

Superb bahut hi acchi line hai zindgi jine ka ek tarika jo sayad ham bhulte ja Rahe hai.
Outstanding..... Tejaswini

Tejaswini said...

Thank you Papa and Nitin.. :)

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...