Saturday, 31 May 2014

           बी हैप्पी औल्वेज़!!!!! पर कैसे???

हर कोई हमेशा यही कहता है की हमेशा खुश रहो अच्छा लगेगा सेहत अच्छी रहेगा ....हाँ जी मैं इस बात से अग्री करती हूँ पर कभी आप भी सोचिये की लाइफ में टेंशन होते हुए आप कैसे हैप्पी रह सकते हो...हर सुबह आँख खुलते ही दिमाग में हज़ार तरीके के टेंशन काम करने की जल्दी रहती है आँख खुले ही भाग-दौड़ शुरू हो जाती है...कभी ये नहीं लगता की सुबह उठे और पूरा दिन सिर्फ रिलैक्स करें...आप मुझसे ये ज़रूर पूछेंगे की सन्डे का क्या?? हाँ जी,मुझे पता है सन्डे को उठे चाय पिया फ्रेश हुए और जुट गए अपने लैपटॉप पर ऑफिसियल काम,फेसबुक,ट्विटर,जी मेल...पर कभी आपने ये सोचा है की सिर्फ टेंशन में रहना लाइफ का मज़ा न लेना एक बिमारी है जिससे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल है...पर ऐसा भी न हो की थोडा सा भी टेंशन न हो नहीं तो आपका दिन बीतेगा कैसे...खुश रहना बहुत ज़रूरी है ये बात मुझे ठीक से अब समझ में आई है...बचपन में मैं बहुत खुश रहती थी टेंशन से मेरा दूर-दूर तक वास्ता नहीं था डाट पड़ती थी तो सिर्फ खड़े-खड़े हंसती रहती थी...पर जैसे ही स्कूलिंग पूरी हुई मेरी हंसी कही गुम हो गयी...सिर्फ टेंशन ही टेंशन दिमाग में घूमता रहता था..पर अब जब एक्साम्स ख़तम हो चुके हैं मैं फिर से बच्चा बन गयी हूँ मुझे खुश देखकर माँ-पापा भी खूब खुश रहते हैं...पर सवाल ये उठता है की हम टेंशन को अपने आप पर इतना हावी क्यों होने देते हैं?? क्यों उससे डट कर नहीं लड़ पाते??मैं ये नहीं कह रही हूँ की टेंशन मत लीजिये पर इतना ज्यादा नहीं की आपके दिमाग में वाही घूमता रहे इवन आपके सपने में भी ये भूत बनकर  आये..हमारे एनवायरमेंट मैं ऐसी बहुत सी चीजे हैं जो हमारा टेंशन रिलीज़ कर सकती हैं और आपके पास सबसे अच्छा आप्शन है खुली हवा....कभी छुट्टी लो और दिन भर सिर्फ अपने आस-पास की ग्रीनरी देखो स्मार्ट फ़ोन,लैपटॉप से दूर पूरा दिन सिर्फ मस्ती...मैं भी ग्रीनरी के पास ही खिड़की पे बैठी हूँ जिसके सामने गुलमोहर का पेड़ है..आम से लदा हुआ आम का पेड़,ठंडी-ठंडी हवा और न चुभने वाली धूप...आप भी कभी ऐसा करिए तो ऑय ऍम शयोर आपको बहुत अच्छा लगेगा काम भी करिए और मज़ा भी लीजिये...शायद आपका कुछ पुण्य हो जाए...पेंटिंग करिए,आम तोड़-तोड़ कर खाईये,गॉसिप गर्ल्स बन जाईये पर १ दिन के लिए इन स्मार्ट फ़ोन्स,लैपटॉप,टीवी से दूर रहिये सिर्फ १ दिन गुरु...आइ होप आपको मज़ा आएगा...कल सन्डे है तरी करके देखिये १ दिन में आप कुछ नहीं बिगड़ेगा...सिर्फ १ दिन....ऑल द बैस्ट....टेक केयर... J J

Monday, 26 May 2014

ये दुनिया पाती पंगे,फिर बोले हर-हर गंगे

            
कुछ इंडियंस बड़े ही चालू होते हैं..आप पूछेंगे क्यों अरे भाई आपने कभी नोटिस किया है की जब इनका टाइम अच्छा चलता है तो इनका प्रेम सिर्फ धन ही होता है चाहे वो पैसा गलत तरीके से ही क्यों न कमाया गया हो ब्लैक मनी यू नो....पर जब पुलिस के चक्कर में फंसते हैं तो दान दक्षिणा,पूजा पाठ,हवन,भंडारा भगवान् को पटाने के लिए हर टाइप के तरीके शुरू हो जाते है पर हमारे  भगवान इतने चालु तो हैं की किसी की मन की बात को जान लें....लोगों को इतनी भी अकल नहीं है की भगवान् सब देख रहा है पहले तो गलत तरीके से पैसा कमाते है और जब पकडे जाते हैं तो इनका हर-हर गंगे शुरू हो जाता है इनकी मेंटेलिटी कभी नहीं बदलने वाली है....अरे भाई ऐसा काम ही मत करो जिसके  लिए प्रयश्चित करने के लिए हर-हर गंगे करना पड़ा आप कभी तो ऐसा काम करो जिसके लिए आपको सम्मानित किया जाए उसके लिए आप भगवान् जी से ब्लेस्सिंग्स मांगो...ये सिर्फ बड़ों की ही बात नहीं है बच्चे और यूथ भी इसमें खूब आगे है पहले स्कूल या कॉलेज में खूब लड़ते हैं फिर भगवान् से कहते हैं की भगवान् जी प्लीज आप ही सम्हालो ये बात प्रिंसिपल तक नहीं पहुचनी चाहिए सिर्फ लड़ाई-झगडे की ही बात नही है बल्कि एक्साम्स में पास होने के लिए भी भगवान् जी को मक्खन लगाया जाता है एक मशहूर फिल्म में आने देखा ही होगा एक स्टूडेंट कहता है की “हे भगवान् मेरा फिजिक्स बचा लेना 100 रूपए पर डे चढ़ाऊंगा” मतलब साल भर आप घास चील रहे थे क्या?? जब पढने का टाइम होता है तो आप गुलचर्रे उड़ाते हो और जब रिजल्ट्स का टाइम आता है तो जय हनुमान ज्ञान गुन सागर शुरू हो जाता है...पर इसमें भगवान् जी क्या करें ये आप पर डिपेंड करता है की आपने एक्साम्स के लिए कितना पढ़ा इक्साम्स में भगवान् जी थोड़ी ही लिखकर आये हैं...एक्साम्स में तो आप लिखर आये हैं तो आपको ही पता होगा की आप कितने पानी में हैं...चलिए अब मैं क्या कर सकती हूँ सबकी भगवान् में अपनी-अपनी श्रद्धा है पर मैं सोचती हूँ की साल भर आप मेहनत से पढो फिर जब एक्साम्स में टॉप कर जाओ फिर आप भगवान् के दरबार में जाओ तो एक अलग ही पॉजिटिव फीलिंग आती है मन में लगता है की अगली बार और मेहनत करूंगी मैं ये बातें फेक नहीं रही हूँ ये बातें मैंने खुद फील करी हैं...चलिए कोई बात नहीं अगर आपको मेरी बातें गलत लग रही हैं तो करते रहिये हर-हर गंगे और मुझे बक्ष दीजिये!!!कष्ट के लिए खेद है....ऑल द वैरी बेस्ट....

                                 

Saturday, 24 May 2014

वाह!!! लाइफ हो तो ऐसी


               

आज सुबह तक जो मूड इतना खराब था शाम होते होते बिलकुल फ्रेश हो गया...आप पूछेंगे क्यों आज शाम अपने स्कूल,कॉलेज में जीते सर्टिफिकेट,शील्ड्स और मेडल्स देखे तो अपने स्कूल देस की याद आ गयी कितनी खुराफाती थी मैं....अपने क्लास्स्मेट्स को परेशान करना उनकी शर्ट पर पेन से 420 लिखना मेरी सबसे पोपुलर शैतानी थी आज जब मेरे एक्साम्स ख़तम हो चुके हैं तो स्कूल के दिन बहुत याद आते हैं बड़ा अमेजिंग मोमेंट था जब मेरी प्रिंसिपल मैम ने कहा था “first prize goes to miss Tejaswini Ojha in singing,debate and she is also a best anchor of our school” वो मोमेंट अभी तक मुझे याद है फिर तालियों से पूरा हॉल गूँज रहा है और जब मैं 12th क्लास में थी तब मैम ने बोला “our new vice captain+discipline incharge is Tejaswini Ojha” वो मोमेंट अभी तक मुझे याद है जब प्रिंसिपल मैडम ने अपने हाथ से मुझे स्वीट्स खिलाई थी...आज वो टीचर बहुत याद हैं  मेरे स्कूल टाइम में सबसे ज्यादा मुझे सपोर्ट किया जबभी स्कूल में कोई भी एक्स्ट्रा करीकुलर एक्टिविटीज होती थी तो मैम जानबूझकर मेरा नाम सबसे ऊपर लिख देती थी मुझे ठीक कॉम्पिटिशन के 1 दिन पता चलता था और घर आते ही मेरी प्रैक्टिस शुरू हो जाती थी...और जब मैं 1st आती थी तो मैम की तालियों की आवाज़ सबसे ऊपर रहती थी फिर स्कूल का लास्ट दिन मेरा सबसे खराब दिन था जब मैं लास्ट बार मैम को देखा था....फिर मेरा रिजल्ट आया सारे सब्जेक्ट्स में अच्छे मार्क्स सोशियोलॉजी में 84 मार्क्स आये तो सबसे पहले मैं पापा से कहकर मैम को कॉल किया उन्होंने कहा “beta you were always a brilliant  student I am proud of you beta god bless you”.

कुछ समय बाद ही मेरा एडमिशन एक कॉलेज में हुआ वहां मुझे लगा शायद यहाँ के टीचर्स थोड़े डिफरेंट हों पर में गलत थी मेरे 1st डे पर ही मेरा सामना एक बहुत ही डोमीनेटइंग टीचर से हुआ मैं अपनी क्लास ढूंढ रही थी उन्होंने पीछे से कहा “can I help you beta” मैंने कहा मैम मुझे मेरी क्लास नहीं मिल रही है सबकुछ बहुत नया है मैम ने कहा कोई बात नहीं बेटा धीरे- धीरे एडजस्ट कर लोगी फिर मेरी इंग्लिश की क्लास लगी मैं इतनी खुश हुई जिस टीचर को मैने सीढ़ियों पर देखा था वाही मेरी क्लास टीचर बनी मैं बहुत खुश हूँ उनके साथ आज मैं बहुत लकी महसूस करती हूँ जो टीचर जिस नेचर की टीचर मुझे स्कूल में मिली बिलकुल वैसी टीचर मुझे कॉलेज में मिली तभी तो इन दोनों टीचर्स से मैं फेसबुक पर कनेक्ट हूँ उनकी बहुत अच्छी गाइडेंस मुझे मिलती है शायद मेरे जैसा लकी और कोई नहीं होगा ....आज भी मैं उन दोनों टीचर्स की उतनी ही इज्ज़त करती हूँ जितना पहले करती थी ये दोनों टीचर्स हमेशा से ममेरी बेस्ट फ्रेंड रहीं ....उनकी ब्लेस्सिंग्स हमेशा मेरे साथ रहे सिर्फ ये ही मेरी विश है.... J

क्यों कर रहे हैं टीचर्स का अपमान!!!!

          
आज मेरा मूड बहुत खराब है थकने के बाद सोचा थोड़ी देर टीवी देख लूं पर मुझे पता नहीं था की टीवी देखने के बाद मूड इतना खराब हो जाएगा आज टीवी पर एक स्टोरी देखि कुछ टीन ऐजेर्स की और उनके टीचर की...टीचर ने स्टूडेंट्स को डिसिप्लिन सिखाने के लिए उनको पनिश किया इवन उनको मारा भी पर स्टूडेंट्स ने डिसिप्लिन सीखने के बजाय टीचर का ही शोषण करना शुरू कर दिया उस टीचर को स्टूडेंट्स ने इतना परेशान किया की उस टीचर ने पढ़ाना ही छोड़ दिया....आप मेरी बात से अंदाजा लगा सकते हैं की उस टीचर का कितना अपमान हुआ होगा....ज़रा सोचिये की जिस गुरु को  हमारी सोसाइटी में भगवान् से भी ऊपर का दर्जा दिया  गया है उसी गुरु का हम इतनी बुरी तरह से अपमान कर रहे है...शर्म आणि चाहिए ऐसे स्टूडेंट्स को...मैं आपको एक और कहानी सुनाना चाहती हूँ कुछ टीन एजेर्स ने अपने गुरु की फेसबुक प्रोफाइल पर इतने भद्दे –भद्दे कमेंट्स किये की उस टीचर की नज़र शर्म से झुक गयी....ऐसे स्टूडेंट्स ख़ाक अपना करियर बनाएंगे जब स्टूडेंट्स के मन में अपने गुरुओ के लिए ज़रा सी भी इज्ज़त नहीं है तो वो स्टूडेंट्स कभी भी अपने लाइफ में आगे नहीं बढ़ सकते...उम्लोग टीचर्स डे तो बहुत ख़ुशी से मनाते हैं...कॉस्टली गिफ्ट्स,फ्लावर्स,ग्रीटिंग कार्ड्स पर इस थोड़ी थोड़ी सी देर में हम अपने गुरुओ की जितनी इज्ज़त करते हैं पूरा साल भर उनका मज़ाक बना कर रख देते हैं...मुझे अपने स्कूल टाइम की एक स्टोरी याद आती है दिवाली का टाइम था क्यच स्टूडेंट्स ने टीचर की टेबल के नीचे बम रख दिया और जैसे ही टीचर ने एंटर किया उस बम में आग लगा दिया और टीचर का डरा हुआ चेहरा देख कर उसकी विडिओ बना दी और नेट पर वायरल कर दी...मतलब हद होती है बतमीजी की और स्टूडेंट्स चाहे  अपने टीचर्स की कितनी भी इंसल्ट करें पर टीचर्स के मन में हमेशा अपने स्टूडेंट्स के लिए सॉफ्ट कार्नर रहता है टीचर्स हमेशा चाहते हैं की उनके स्टूडेंट्स आगे बढ़ें और अपने लाइफ  में एक  सक्सेसफुल लाइफ लीड करें...स्टूडेंट्स  को भी ये बात समझनी चाहिए की टीचर अगर उनको मार रहा है उन्हें डिसिप्लिन बनाना चाह रहा है तो स्टूडेंट्स भी अपने टीचर्स के साथ कॉर्पोरेट करें जैसा टीचर कह रहा है उनकी बात माने आज जितने भी यूथ या स्टूडेंट्स मेरा ब्लॉग पढ़ रहे है उनसे मेरी रिक्वेस्ट है की अपने टीचर की रेस्पेक्ट करें और ऐसा कोई भी काम न करें जिससे उनको दुःख हो......please please respect your teachers… आप कोई भी ऐसा काम न करें जिससे आपके टीचर्स को गिल्टी फील हो.


Friday, 23 May 2014

               बाबाजी बन गए भगवान्!

एक सबके आदरणीय  बाबा का तो नाम आप सबने सुना होगा...आजकल टीवी पर खूब छाए हुए हैं ये बाबाजी बस यही इनके मुह से निकलता है “लास्ट बार गोलगप्पा कब खाया था खाना शुरू कर दो कृपा आनी शुरू हो जाएगी” सिर्फ ये बाबा ही नहीं टीवी पर भी खूब सारे बाबाओं का बोलबाला है  लम्बे बाल वाले बाबा तो आपको याद ही होंगे तो इतने तेज़ी से क्या बोल जाते सब दिमाग के ऊपर से जाता है पर बाल पर गौर फरमाईये तो लगेगा दिन में ७ बार पैंटीन उसे करते हों चलो मुझे क्या मुझे तो अपने ब्लॉग के लिए मसाला चाहिए था पर चलिए आप मुझे कोई ऐसे बाबा का नाम बताइये तो स्क्कैम में न फंसा हो मैं किसी बाबा की कोई आलोचना नहीं कर रही हूँ पर ये आप सब से पूछना चाहती हु की क्यों हम इन बाबाओं को भगवान् से भी ऊपर का दर्जा दे देते हैं...पर मेरे लिए मेरे भवान ही सबकुछ हैं बस मैं और मेरे भगवान् बीच में कोई नहीं...मैं चाहती हूँ की हम सब के मन  में बाबाओं को लेकर एक बॉर्डर लाइन बन जानी चाहिए जिसके आगे किसी भी बाबा को आने की परमिशन नहीं होनी चाहिए उसके आगे सिर्फ और सिर्फ भगवान् प्लीज इसके बारे में एक बार ज़रूर सोचियेगा....तबतक खाते रहिये गोलगप्पा और कृपा बनाए रखिये बाबाजी की कृपा पर मेरे तरफ से सब बाबाओं को आदरणीय बाबाजी का ठुल्लू...... J

Thursday, 22 May 2014

भगवान् का ये कैसा अपमान

                         

आज कल के गाने तो आपने ज़रूर सुने होगे...भला टीवी चलाइये और म्यूजिक चैनल न लगायें ऐसा हो सकता है क्या...पर मेरा मन अब गानों से ऊब चूका है आप पूछेंगे क्यों??? क्युकी जिस भगवान् की मैं इतने आदर के साथ पूजा करती हूँ  उसी भगवान् का हर गाने में इतनी बुरी तरह अपमान मैं नहीं देख सकती...आज कल के गानों में हर जगह या तो भगवान् का नाम जोड़ा जा रहा है और या पूरी की पूरी फिल्म ही हिन्दुओ की धार्मिक भावनाओं को ठेस लगा रही है..कोई भी फिल्म आती है कुछ समय तक उसका विरोध होता है डायरेक्टर या प्रोड्यूसर माफ़ी मांगते हैं फिर सब शांत हो जाता है किन्तु परन्तु उस फिल्म पर बैन नहीं लगता है और वो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाने वाली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हित भी हो जाती है...हाल ही में रणवीर सिंह और दीपिका की ही एक फिल्म पर बहुत कोन्त्रोवेर्सी हुई पर फिल्म दिखिए कितनी हित हुई...इस फिल्म के गानों में भी एक अजीब सी बात दिखी उस गाने की एक लाइन थी “राम जी की चाल देखो करें ये धमाल देखो” शायद ये गाना दोसरों को मामूली लगे पर मेरे मन पर इस गाने ने गहरी चोट की है तभी तो जब भी ये गाना टीवी पर बजता है तो मेरा खून खौल उठता है आप भी जारो सोचिये की जिस भगवान् की हम इतने आदर के साथ पूजा करते है  जब भी कोई मनोकामना होती है तो भगवान् के सामने हाथ जुड़ जाते है उनके सामने प्रसाद,अगरबत्ती और दिया जलाते हैं वाही भगवान् का अपमान हम खड़े खड़े कैसे देख सकते हैं..घर पर कोई भी खुशखबरी आये या कोई कष्ट हो हम भगवान् को ही याद करते हैं तो फिर गानों में होनेवाला उसी इश्वर का अपमान हमें क्यों नहीं दिख रहा है क्यों इस अपमान को हम देखकर भी अनदेखा कर रहे है....इस विषय में सोचियेगा ज़रूर तब तक सुनते रहिये और मस्त रहिये इन भद्दे गानों की लय में... L

Wednesday, 21 May 2014

नेताओं कृपा करके जनता को नो उल्लू बनाविंग

       
चुनाव का समय...न्यूज़ में हर जगह पॉलिटिक्स पर ही बहस होती रहती है..साल भर नेता सिर्फ a.c. की हवा खाते हैं आयर जब समय आता है तो जनता को बाबा जी का ठुल्लू दिखाते हैं....साल भर अपने विकास का गुणगान करते हैं..जनता हो उल्लू बनाना इनके बाये हाथ का खेल है..पहले हाथ जोड़कर वोट मांगते है फिर तो आप जानते हैं ही जनता को उल्लू बनाविंग...अब इन नेताओं के बारे में सोचने से क्या फ़ायदा...पर हमारे देख का युवा वर्ग इतनी आसानी से इन सबके जंजाल में नहीं फसने वाला है युवा वर्ग इतना होशियार और टेक सेवी हो गया है की इनको नेता इतनी आसानी से उल्लू नहीं बना सकते..इनसब को वोट न देकर यूथ नेताओं को बाबाजी का ठुल्लू दिखा रही है एक ऐसे ही नेता हमारे बीच आये सर पर “मैं हूँ आम आदमी” की टोपी और हमेशा खास्ते रहने वाले चेहरा पेहले लगता था की शायद ये हमारे देश का भविष्य बदलेंगे पर  इन्होने भी देख को उल्लू बना दिया पहले कहते थे की कभी सरकारी बंगले में नहीं रहूँगा परन्तु गिरगिट ने अपना रंग बदल ही दिया...और इस कहानी के अंत में उन्हें इस्तीफ़ा देना ही पड़ा..इधर बीच मोदी अंकल खूब छाए हुए हैं वो उत्तर प्रदेश से करीब ३ लाख वोटों  से जीते हैं पर मुझे उनपर पूर्ण विशवास है की वो  उत्तर प्रदेश पर और बाकी जगहों पर अच्छे से रूल करेंगे बेस्ट ऑफ़ लक मोदी अंकल...जनता को सिर्फ एक ही बार समय मिलता है भ्रष्ट नेताओं से बचने का वो है अपने सही लीडर का चुनाव करना...इसी के द्वारा जनता नेताओं की वाट लगा सकती है...भ्रष्ट नेताओं से निवेदन हैं की “देश की जनता को कृपा करके नो उल्लू बनाविंग”..... J

                                         तेजस्विनी ओझा.. J         

Tuesday, 20 May 2014

God’s gift for me

                       
I asked for strength and-God gave me difficulties to make me strong,
I asked for wisdom and-God gave me problems to solve it,
I asked for prosperity and-God gave me brain to work,
I asked for courage and-God gave me dangers to overcome,
I asked for love and-God gave me opportunities,
I received nothing I wanted and Everything I needed…. J


नाना-नानी की कहानियाँ

                                      
मेरा बचपन नाना-नानी की कहानियों को सुनते ही बीता जब मेरी गर्मियों की छुट्टियां शुरू होती थी और मेरे स्कूल से लौटते ही माँ कहती थी की सामान पैक करो इलाहाबाद जान है एक तो नाना-नानी से मिलने की खुश,उन दोनों का लाड प्यार और ऊपर से उनकी आवाज़ में मीठी-मीठी कहानियां...नानी के बाजुओ पर सर रखकर आराम से लेटकर कहानियाँ सुनना मुझे बहुत पसंद था...
मेरी नानी बहुत ही अच्छी और बहुत ही शांत रहती थी...मेरे जन्मदिन पर माँ और पापा से भी पहले मेरे नाना-नानी का फ़ोन आता था और दोनों मिलकर मुझे गुड विशेस देते थे...उनका रोज़ दिन में ७-८ बार फ़ोन करना ऐसा लगता था मानो मैं उनके साथ ही हूँ...बहुत याद आते हैं वो दिन एक बार मैं नर्सरी में पढ़ती थी मैं पापा के पास गयी और कहा की पापा इस कागज़ पर नाना और नानी का फ़ोन नंबर लिख के दे दीजिये पापा काम मैं बहुत व्यस्त थे उन्होंने फटाक से मुझे नानी का नंबर लिख के दे दिया शाम को पापा के ऑफिस जाते ही मैंने उन्हे चुपके से फ़ोन कर दिया और कहा किक नानी मुझे आपकी बहुत याद आ रही है उन्होंने कहा अरे मेरी प्यारी चुन-चुन मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही थी अच्छा हुआ तुमने फ़ोन कर दिया उन्होंने कहा बेटा मम्मी कहाँ हैं बात कराओ और मेरी सिट्टी-पिट्टी गुल...बहित डर लग रहा था की अगर पापा को इसके बारे में पता चल गया तो मेरी खैर नहीं....पर ऐसा कुछ नहीं हुआ...सब भगवान् की दया थी...एक खतरनाक किस्सा आपको सुनाती हूँ मैं करीब ६ साल की थी नानी के घर एक नै वाशिंग मशीन आई थी मैं पहली बार वाशिंग मशीन देख रही थी...नानी ने कहा चुन चुन जाओ बाहर रखे कपड़े उठा लाओ मैं इतनी ज्यादा खुश थी की ज़मीन पे गिरा हुआ पानी ही नहीं देख पायी और मेरा पैर फिसल गया मेरी आँख शेटर में फंस गयी जिसे निकालना बहुत मुश्किल हो गया....मेरा बड़ा भाई दौड़ के आया तो देखा मैं दर्द से परेशान थी और पूरी फर्श पर खून-खून था वो जल्दी से मुझे उठा के अन्दर ले गया सबका ध्यान वाशिंग मशीन से हटकर मुझपर आ गया.और उस चोट का निशान आज भी मेरी आँख पर मौजूद है..उस समय मैंने जितने भी परेशान चेहरे  देखे उसमें सबसे परेशान चेरा मेरी नानी का ही था...अब नानी के बाद नाना जी के बारे में बात करना तो बनता है...मेरे नानाजी आर्मी में थे...मुझे शुरू से लेकर अब तक के जीवन में नाना जी का लगाव देखने को मिलता है...जिस दिन मेरा रिजल्ट आने का दिन होता है मेरे रिजल्ट आने के आधे घंटे पहले ही उनका फ़ोन आना शुरू हो जाता था और आज भी यही होता है...उनका इस तरह से फ़ोन करना मेरे लिए एक आशीर्वाद की तरह होता है और जिस दिन उनका फ़ोन नहीं आता पूरा घर परेशान हो जाता है...बचपन में मेरी शैतानियाँ आसमान पर चढ़ी हुयी थी वो बेचारे पौधे लगाते थे और मेरा काम उन पौधों को उखाड़ना था नाना जी इन बातो को लेकर कभी गुस्सा नहीं हुए बस उनका यही वाक्य हमेशा रहता था एक था “ये क्या कर रहे हो हाँ” और दूसरा था “अभी मारता हूँ”उनकी डांट सुनने के बाद बस मैं पाइप उठाटी थी और मेरा पौधों को पानी देना शुरू हो जाता था...जबभी मैं उनसे कहानियाँ सुनाने का कहती थी तो हर बार एक ही लाइन “एक शेर था बहुत ही धम्माजा”...उसके बाद स्टोरी ख़तम पूछो क्यों क्यूंकि नींद मुझे घेर लेती थी...एक और बात मुझे आज भी याद है जब भी नानाजी पूजा करने के लिए दिया और अगरबत्ती जलाते थे तो मैं उस अगरबत्ती को अपनी फूक से बुझा देती थी मेरी  यही शरारत नानाजी को बहुत पसंद थी आज भी जब मैं मम्मी के साथ मिलकर अपने पुराने दिन याद कर हूँ तो यही सब याद करने को रह जाता है और फिर काम में वापस लगना पड़ता है और मेरे बचपन की यादें फिर से धुंधली पड़ जाती हैं...इलाहाबाद जाकर वही घर वही जगह जहां मेरी आँख पर चोट लगी थी देखकर वाही यादें मेरे ज़हन में ताज़ा हो जाती है जिसे  भूलना मेरे लिए जीवन भर कभी संभव नहीं हो पायेगा...miss u nanaji and naniji….
                                                                                                                                                   With love,
                                                                                                                                              Tejaswini Ojha

                                                                                                                                               (chun-chun)…J

Monday, 19 May 2014

क्या है ये फेसबुक का नशा???

     
अगर आज भगवान् मेरे सामने आ जाएं तो मैं ये बात उनसे पूचोंगी की क्यों फेसबुक का नशा ऐसा छा जाता है की इंसान को अपने से बड़ो की बात सुनने का मन ही नहीं करता क्यों ऐसा लगने लगता है की फेसबुक से आगे मेरी कोई दुनिया ही नहीं है....ऐसा कुछ मेरे साथ भी हो रहा है अगर आपने किसी को फेसबुक पर मेसेज किया और उस मेसेज को सीन करके उसका रिप्लाई ना आये तो मन में उस इंसान के लिए अजीब सा गुस्सा आ जाता है या आपने कोई फोटो डाली उसका लाइक न ता आये तो  दिमाग में अजीब सा गुस्सा पनपने लगता है...आज समझ में आ रहा है की इस जाल में हर इंसान  रोज़ रोज़ गहराई से फंसता  ही जा रह है  ...कोई भी इंसान अगर फेसबुक पर है और उसके फैमिली मेम्बेर्स उससे ज्यादा फेसबुक से बैठने को मन कर रहे हैं तो उससे उनकी बात बकवास लगने लगती है उनकी बार सुनने की अन्दर से कोई इच्छा नहीं होती...ये फेसबुक नाम का कीड़ा हर किसी के दिमाग में घुस चुक्का है जिसे निकालना हर किसी के लिए इम्पॉसिबल होता ही जा रहा है...इसी की वजह से जो टाइम आपको अपने काम में  चाहिए वो टाइम आप इस वेबसाइट पर लगा रहे होते हो...मैं मानती हूँ की इससे आप अपने फ्रेंड्स,फैमिली मेम्बेर्स,अपने ऑफिस के दोस्तों से कनेक्ट में रह सकते हो पर ये नशा आपको ही नहीं बक्षेगा...अगर कभी आपने सोच लिया की चलो बंद कर देते है और इसे डीएक्टिवेट कर दिया फिर भी आपका मन कभी भी नहीं मानेगा और आप इसे वापस एक्टिवेट कर ही लोगे....फिर वापस आपका लाइक,कमेंट और पिक्चर अपलोड करना शुरू हो जाएगा जिससे आप कभी उभर नहीं पाओगे इसके लिए एक ही उपचार है की अपनी विल पॉवर स्ट्रोंग की जाए जिससे आपका मन भटकेगा नहीं क्युकी डीएक्टिवेट करने का कोई मतलब नहीं है...आपको वापस उसी ढर्रे पर आना है.... L
















                                                       

Sunday, 18 May 2014

धुनकी धुनकी धुनकी लागे!!

                     
आखिर क्या है ये धुनकी...आज कल के गानों में असलियत से ज्यादा बढा चढ़ाकर गाये जाते हैं ..जैसे सुनो न संगमरमर...बेचारी अच्छी खासी हीरोइन को संगमरमर बना दिया रियलिटी से ज्यादा की दुनिया में जीते हैं ये कंपोजर...जैसे बेबी डॉल मैं सोने दी...डॉल कोई जिंदा थोड़ी है जिसे आप सोने दो इसके आगे की लाइन में है ये दुनिया पित्तल दी...अरे ओ मैडम ये जीता जागता संसार है कहाँ आपने उसको पीतल का बना दिया...और एक और गाने में लाइन है कोई खलिश है हवाओं में बिन तेर मतलब क्या तमाशा है यार जो कभी बदल ही नहीं सकता उसको ज़बस्दस्ती बदलना तो बेवकूफी है....चलिए अब ये गानों की माया गायक ही जाने उसमें दूसरो को बनाते रहें संगमरमर,बेबी डॉल मेनू की फरक पैंदा है....पर कभी कभी सोचती हूँ की लोग इन सब गानों में मदहोश हो कैसे जाते हैं की अपने इन्टरनेट का डाटा ख़तम करके इसे डाउनलोड करते हैं...ऐसा नहीं है की मैं गाने लोड नहीं करती..मैं भी जब छोटी थी तो खूब गाने डाउनलोड कर थी उस समय ये गाने मुझे बहुत अच्छे  लगते थे अभी भी लगते है पर उनकी एक लिमिट बन गयी है...मैंने सोचा की जब इन गानों में कोई रिएलिटी ही नहीं है तो इन्हे लोड करने का क्या मतलब है....मैं तो समझ चुकी हूँ पर पता नहीं बाकी लोग कब समझेंगे....चलो बाकी के लोगो जब तक नहीं समझ आता तब तक धुनकी धुनकी बजाते रहो....god bless you…भगवान् आपको सद्बुद्धि दे.....
                                                तेजस्विनी ओझा... J

Saturday, 17 May 2014

व्हाई दिस कोलावेरी डी

                          
सालो पहले ये गाना काफी प्रचलित हुआ था...चाय वाले के ठेले से लेकर लाउन्ज,दिस्कोस में भी ये गाना काफी प्रचलित था....भलेही इस गाने का मतलब किसी को ना समझ में आये या शायद कुछ को आये भी ...वाह कितने भोले है हम भारतीय दो साल पहले आई फिल्म डेल्ही बेली में गाना था भाग भाग डीके बोस स्कूल से लौटते वक्त एक बच्चा जो ५ साल का होगा  उसे गाते हुए सुना...जो बच्चा जिसे इस गाने का मतलब भी ठीक से नहीं पता वो बच्चा इस गाने को इतना  खुश होकर गा रहा है जैसे कोई भगवान् का भजन गा रहा हो...हम गाने के मतलब से ज्यादा उसके म्यूजिक पर ज़ोर देते है की उसमें किस तरह का म्यूजिक है उसमें किस तरह के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स का यूस किया क्या है चाहे उस गाने में कितने ही अपशब्द कितनी ही गाली गलौच क्यों न हो पर हमारा यूथ उस गाने को लीड के थ्रू सुनने में मज़ा का अनुभव करता है...पुराने गाने जो मीठे और सुन्दर हुआ करते थे उनको यूथ अब बाबाजी का ठुल्लू दिखा रहा है...दम मारो दम पुराना गाना है पर इसमें कोई अपशब्द का इस्तेमाल नहीं हुआ है पर कुछ सालो पहले  फिल्म दम मारो दम में ही इस गले तो सुनिए तो आपको पता चल जाएगा की दोनों में क्या फर्क है...हिंगलिश गाने भी बड़े प्रचलित हैं अब तो अगर फिल्म अच्छी भी हो पर उसके शब्दों में शराब,बीडी आदि मादक पदार्थो के शब्दों का प्रयोग होता है तो आगे की फिल्म देखने को मन ही नहीं करता हम फिल्मो की तुलना उसके गानों से करते हैं अगर गाना बकवास है तो फिल्म अच्छी होने के बावजूद हम गानों के आधार पर उसे बकवास घोषित कर देते है...जैसे           में आई फिल्म 3 इडियट्स में गाने की एक लाइन थी “स्कालरशिप की पी गया दारु गम तो फिर भी पिटा नहीं” इस गाने से आप फिल्म का गलत अंदाजा लगा सकते हैं....पर बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने अच्छी खासी कमाई की...स्टार्स भी काफी अच्छे मिले अगर हम फिल्म बनाते समय गाने भी अच्छे एडिट करें तो सोचिले फिर तो फिल्म की बॉक्स ऑफिस की मौजा ही मौजा......प्लीज इस बारे में सोचिये गा ज़रूर तब तक बजाते रहिये “व्हाई दिस कोलावेरी डी”

                                               तेजस्विनी ओझा.. J

Importance of 1.



                                                   J      
To realise the value of 1 year.
Ask a student who has failed in his exams.
To realise the value of 1 month.
Ask an imployee who has not got his pay.
To realise the value of  1 week.
Ask an editor of a weekly.
To realise the value  of 1 day.
Ask a labourer taking daily wages.
To realise the value of 1 hour.
Ask a patient who is unable to breath.
To realise the value of 1  minute.
Ask a person who has missed the train.
To realise the value of 1 second.
Ask a person who has survived an accident.
To realise the value of 1 millisecond.
Ask the person who has won a gold medal in Olympics…. J
                                                                                                             Tejaswini Ojha… J





IF GOD WAS A HACKER

Kitni badi hai internet ki duniya…….you can’t imagine….bas google ke ek click se you can find out what you want….it is so easy…roz aap ke darvaazey par newspaper aane se pehle newspaper aap ke saamne epaper par hota hai…not only newspaper online test and online banking are also taking place….pehle ke samay mein to bank ke baahar line mein khadey khadey hi aadha din beet jaata tha but ab the result is frount of you…..really it’s like a magic…not only official work you can also search news related to atmosphere and weather…..Weather o my god how can I forget it….the website of IMD it is so easy to know ki agle 24 ghantey mein weather kaisa hone waala hai  kya ye magic se kam nahi hai…..chaliye let me introduce you to my hero my papa Shree Rajiv Ojha…pehli baar unko hi maine net surfing karte huye dekha tha I was really very surprised next morning when I saw my paa downloading some old songs on You Tube maine papa se turant poocha ki how are you able to download such beautiful and melodious songs from this site papa…he answered me very sweetly ‘”from you tube beta first of all install you tube downloader from net and then drop a link of the song you want…your song is download beta it is very easy you can also try it”…..tabse mujhpe gaane download karne ka bhoot sawaar ho gaya…..i was really very happy….o my god now the topic is SOCIAL NETWORKING naam sunne ki aadat ho gayi hai….aisi website jispe aap apne se door rehne waale rilatives family members even teachers se connect ho sakte ho kitna aasaan hota hai apni id banana….bas first name, last name,date of birth,gender and your id is ready….wow…but shaayad kuch youth iska misuse karke apni aur doosro ki life ko khatrey mein daal dete hai….cyber crime…doosre naam se id banana,fake pictures,fake information and sab kuch fake……ek din papa ke saath baithkar news dekh rahi thi K news tabhi internet se judi koi news mein cyber expert ka face saamne aaya…main papa se poocha papa who are cyber experts???? Unhone kaha beta jo internet par gandagi failaata hai ye experts usko saaf karte hain……us samay to hasi aa gayi but at that night when I was sleeping I just wonder ki agar bhagvaan hi cyber expert bankar aate to ye internet pe koi crime hota hi nahi….koi darindagi hi nahi ho paati bhagvaan sab samhaal lete….kuch samay baat computer mein badi problem aa gayi papa bahut tension mein they ki kya hoga in saare fasaad ki jad Tejaswini Ojha thi….maine downloading ke samay kuch aisa download kar liye jissey PC mein virus aa gaya I was really very scared par meri jaan mein jaan tab aayi when a cyber expert came to our house main dekhna chahti thi ki vo kis tarah virus hata rahe hain but dekh nahi paayi jab vo mahaashay chale gaye tab maine dekha my PC was secured…..i was really very surprised tab se mere man mein cyber expert banney ki iccha prajwalit ho gayi….bas exam khatam hone k der hai us ke baadjugaad.com ab virus ke liye bhagvaan ko kya pareshaan karna agar sab bhagvaan hi karte to mere bhia Sumit Singh kya karte….ye likhne ke baad shaayad meri khair nahi…..…… MTV WEBBED ….aaj ke youth ko kin-kin pareshaaniyon ka saamna karna pad sakta hai ya pad raha hai….uske bare mein hai….. I just want to say all readers THINK BEFORE YOU CLICK…Take care of yourself……

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...