Tuesday, 24 June 2014

स्मार्टफोन…? धिसते रह‌िए अंगूठा



जैसे ही स्मार्टफोन का नाम लेते हैं तो ऐसा लगता है की वो कह रहा है स्मार्टफोन नाम तो सुना होगा’...क्युकी अब स्मार्टफोन की ऐसी आदत लग चुकी है की इससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल है। अभी ही स्मार्टफोन की इतनी खुमारी है तो ये सोचिये की आगे जाकर क्या हाल होगा। हर कोई स्मार्टफोन से जो चाहे कर सकता है शौपिंग,बैंकिंग, ऑनलाइन बुक्स भी खरीद सकता है। पर जो फ़ालतू में फेसबुक, ट्विटर या चैट जैसे एप्स यूज़ करते हैं उनकी साईकोलॅजी अभी भी मुझे पल्ले नहीं पड़ती.....कहीं भी निकलिए हर कोई स्मार्टफोन पर अंगूठा घिसता हुआ मिलेगा। मंदिर में, चाट के ठेले पर हर जगह और एक नयी मुसीबत आई है वॉट्स एप।..मुझे नहीं लगता उसमें कुछ ख़ास है बस स्क्रीन टच करते रहो और सबको उल्लू बनाते रहो...अब तो आउट डोर्स के गेम्स का कोई महत्व ही नहीं रह गया है बस बहाने रेडी रहते है कि बाहर गर्मी है, कैसे खेलेंगे..ये बोलकर बस लग जाते है स्मार्टफोन से चैटिंग करने.. मैं सिर्फ स्मार्टफोन की ही बात नहीं कर रही हूँ लैपटॉप, विडिओ गेम्स भी आज की जेनरेशन के पीछे जोक की तरह चिपक गए हैं जिसकी वजह से ऐप्स के अलावा और कुछ दिखाई ही नहीं देता है। बस कान में गन्दी सी लीड लगा लेंगे । आपको पता है लीड लगाने से उसका सीधा असर आपके ब्रेन पर पड़ता है। जिससे आपकी सुनने, समझने का स्टेमिना कम हो जाता है...आखिर ऐसा क्या है कि हम अपने हेल्थ के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। बाहर जाकर आउट डोर्स गेम्स खेलने में हमें आलस आने लगती है...कोई कुछ भी काम बोले तो गुस्सा 100 डिग्री के पार पहुंच जाता है। पहले तो मोबाइलए, इंटरनेट होते ही नहीं थे। सब बाहर जाकर गेम्स खेलते थे पर अब तो एक दिन आपका वॉट्स एप आपके साथ न रहे तो बेचारे यंगस्टर्स डिप्रेशन में चलें जाएँ । पर एक बार बस एक दिन आप मुझे अपने स्मार्टफोन से दूर रह के दिखाइए बाहर जाकर क्रिकेट,बैडमिंटन खेलिए और तब बताईये किस्में ज्यादा मज़ा आता है। पर मुझे मालूम है आप स्मार्टफोन के साथ ही कम्फर्ट महसूस करेंगे चलिए खैर आपकी मर्ज़ी पर शायद आप इससे ज़रूर एक दिन बोर होंगे और वापस बाहर जाकर अपना पसीना बहाएंगे...तब तक घिसो अंगूठ और करो फोटो शेयर अपने स्मार्टफोन पर.... J

1 comment:

rajiv said...

isme pata hi nahji chalta ki kaun kisko ullu bana raha hai...:-)

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...