आखिर क्या है ये धुनकी...आज कल के गानों में असलियत से ज्यादा बढा चढ़ाकर गाये
जाते हैं ..जैसे सुनो न संगमरमर...बेचारी अच्छी खासी हीरोइन को संगमरमर बना दिया
रियलिटी से ज्यादा की दुनिया में जीते हैं ये कंपोजर...जैसे बेबी डॉल मैं सोने
दी...डॉल कोई जिंदा थोड़ी है जिसे आप सोने दो इसके आगे की लाइन में है ये दुनिया
पित्तल दी...अरे ओ मैडम ये जीता जागता संसार है कहाँ आपने उसको पीतल का बना
दिया...और एक और गाने में लाइन है कोई खलिश है हवाओं में बिन तेर मतलब क्या तमाशा
है यार जो कभी बदल ही नहीं सकता उसको ज़बस्दस्ती बदलना तो बेवकूफी है....चलिए अब ये
गानों की माया गायक ही जाने उसमें दूसरो को बनाते रहें संगमरमर,बेबी डॉल मेनू की
फरक पैंदा है....पर कभी कभी सोचती हूँ की लोग इन सब गानों में मदहोश हो कैसे जाते
हैं की अपने इन्टरनेट का डाटा ख़तम करके इसे डाउनलोड करते हैं...ऐसा नहीं है की मैं
गाने लोड नहीं करती..मैं भी जब छोटी थी तो खूब गाने डाउनलोड कर थी उस समय ये गाने
मुझे बहुत अच्छे लगते थे अभी भी लगते है
पर उनकी एक लिमिट बन गयी है...मैंने सोचा की जब इन गानों में कोई रिएलिटी ही नहीं
है तो इन्हे लोड करने का क्या मतलब है....मैं तो समझ चुकी हूँ पर पता नहीं बाकी
लोग कब समझेंगे....चलो बाकी के लोगो जब तक नहीं समझ आता तब तक धुनकी धुनकी बजाते
रहो....god bless you…भगवान् आपको सद्बुद्धि दे.....
तेजस्विनी ओझा... J
1 comment:
Sab bauraye huye hai..bhagvaan sadbuddhi de ...:-)
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