अगर आज भगवान् मेरे सामने आ जाएं तो मैं ये बात उनसे पूचोंगी की क्यों फेसबुक का नशा ऐसा छा जाता है की इंसान को अपने से बड़ो की बात सुनने का मन ही नहीं करता क्यों ऐसा लगने लगता है की फेसबुक से आगे मेरी कोई दुनिया ही नहीं है....ऐसा कुछ मेरे साथ भी हो रहा है अगर आपने किसी को फेसबुक पर मेसेज किया और उस मेसेज को सीन करके उसका रिप्लाई ना आये तो मन में उस इंसान के लिए अजीब सा गुस्सा आ जाता है या आपने कोई फोटो डाली उसका लाइक न ता आये तो दिमाग में अजीब सा गुस्सा पनपने लगता है...आज समझ में आ रहा है की इस जाल में हर इंसान रोज़ रोज़ गहराई से फंसता ही जा रह है ...कोई भी इंसान अगर फेसबुक पर है और उसके फैमिली मेम्बेर्स उससे ज्यादा फेसबुक से बैठने को मन कर रहे हैं तो उससे उनकी बात बकवास लगने लगती है उनकी बार सुनने की अन्दर से कोई इच्छा नहीं होती...ये फेसबुक नाम का कीड़ा हर किसी के दिमाग में घुस चुक्का है जिसे निकालना हर किसी के लिए इम्पॉसिबल होता ही जा रहा है...इसी की वजह से जो टाइम आपको अपने काम में चाहिए वो टाइम आप इस वेबसाइट पर लगा रहे होते हो...मैं मानती हूँ की इससे आप अपने फ्रेंड्स,फैमिली मेम्बेर्स,अपने ऑफिस के दोस्तों से कनेक्ट में रह सकते हो पर ये नशा आपको ही नहीं बक्षेगा...अगर कभी आपने सोच लिया की चलो बंद कर देते है और इसे डीएक्टिवेट कर दिया फिर भी आपका मन कभी भी नहीं मानेगा और आप इसे वापस एक्टिवेट कर ही लोगे....फिर वापस आपका लाइक,कमेंट और पिक्चर अपलोड करना शुरू हो जाएगा जिससे आप कभी उभर नहीं पाओगे इसके लिए एक ही उपचार है की अपनी विल पॉवर स्ट्रोंग की जाए जिससे आपका मन भटकेगा नहीं क्युकी डीएक्टिवेट करने का कोई मतलब नहीं है...आपको वापस उसी ढर्रे पर आना है.... L
3 comments:
Bilkul sahi kaha..kisi bhi cheej ka addiction achcha nahi hota..kaash ye baat doosare youngsters ko bhi samajh ajati...good thoughts...
Kya baat hai kaash youngsters ko ye baat jaldi samajh ajaye to unka samy barbaad na ho ..good going keep it up :-)
Bilkul sahi kaha..kisi bhi cheej ka addiction achcha nahi hota..kaash ye baat doosare youngsters ko bhi samajh ajati...good thoughts...
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