Sunday, 13 November 2016

वो बचपन वापस आ जाए!!

                 
कितनी दूर आ गयी हूँ मैं उस खिलौने से खेल कर,
कितनी दूर आ गयी हूँ मैं उस समय को पीछे छोड़कर, 
कहाँ चले गये तुम बिन बताकर,
क्यों कहीं छुप के बैठ गये तुम मुझसे रूठकर.

काश आ जाए वापस वो खरगोश मेरा,
जिसे सुलाती थी मैं अपने बगल में लेटाकर,
न जाने कहाँ गया वो खरगोश मुझे छोड़कर,
कितनी दूर आ गयी हूँ मैं उस खिलौने से खेल कर.

अब तो बस जीना है मुझे किताबों के अन्दर,
जीना चाहती हूँ मैं फिर से बचपन के अन्दर,
वापस आ जाए वो मेरा प्यारा बचपन,
फिर से जी लूंगी मैं उसे बच्चा बनकर.

                             


  

Tuesday, 25 October 2016

क्या लिखूं???

                       क्या लिखूं???
अपनी मन की बातें लिखूं,
या अपनी हर कहानी लिखूं.
अपनी बचपन की वो यादें लिखूं,
या अपनी हर ख़ुशी का एहसास लिखूं.
नानीजी की वो बातें लिखूं,
या उनको खोने का गम लिखूं.
स्कूल के पहले दिन की बातें लिखूं,
या ग्रेजुएट होने की वो ख़ुशी लिखूं.
दिन में चेहचाहा रही उस चिड़िया के बारे में लिखूं,
या रात में उसे लगने वाले डर के बारे में लिखूं.
दीदी को सारा दिन परेशान करने के बारे में लिखूं,
या उसकी हर समय आने वाली याद लिखूं.
क्या लिखूं..........
क्या लिखूं..........
क्या लिखूं..........

                 -तेजस्विनी ओझा 

Thursday, 8 September 2016

क्या शिन्चैन भी इतना उदास था??


‘शिनचैन नोहारा’’ ये नाम सुनकर आ गयी ना आपके चेहरे पर मुस्कान जी हाँ!! ये वही कार्टून है जिसे आप और हम मिलकर देखते हैं और हँस-हँस के लोट-पोट हो जाते हैं खूब सारी  बदमाशी करने वाला, रोज़ कोई न कोई स्यापा खड़ा करने वाला फूले गाल वाला वो प्यारा सा बच्चा.. उसकी मम्मी मित्सी नोहारा, पापा
हैरी नोहारा बेहेन हिमावारी नोहारा. ये सब हम सबको रोज़ खूब हंसाते हैं. पर क्या आपको पता है शिन्चैन की इस कहानी के पीछे एक बहुत दुखद और आखों में आंसू ला देने वाली कहानी है. जी हाँ!! शिन्चैन एक कार्टून करैक्टर ही नही  बल्कि सच का एक इंसान था. 

चौंक गये ना आज हम आपको बताते हैं शिनचैन की रियल स्टोरी, शिनचैन का असली नाम सिन्नोसूके नोहारा था जिसकी जान अपनी
बेहेन को कार एक्सीडेंट में बचाते-बचाते चली गयी थी. इस से सिन्नोसूके के माँ मिसाए इतनी ज्यादा दुखी हुयीं की उन्होंने एक सुखद अंत वाली एक बुक लिखने की शुरुआत की. इनकी बुक पढ़कर योषिता उसल ने शिनचैन नाम का एक कार्टून बनाया जिसपर आज सब लोग ताली पीट-पीट के हँसते हैं. 
आज जब मेरे वॉट्स एप्प पर ये मेसेज आया तब हमने मन में सोचा की सच में शिनचैन की इस प्यारी सी मुस्कान के बहुत पीछे इतना सारा दर्द छुपा है. ये पढ़कर शायद आप थोड़ी देर के लिए उदास होंगे पर फिर नार्मल हो जायेंगे पर उस माँ का दर्द सोचिये जिसने अपने दोनों बच्चों को खो दिया
फिर भी इतनी अच्छी और पॉजिटिव किताब लिखी जिसे योषिता ने इतने प्यारे ढंग के कार्टून के ज़रिये हमारे सामने पेश किया. 

मैं आज भी शिनचैन देखती हूँ जब मैं घर वापस आती हूँ तो शिनचैन की तरह ‘वेलकम बैक’’ कहती हूँ और शिनचैन की मम्मा की तरह मेरी मम्मा भी कहती हैं ‘ओह हो बेटा आय ऍम बैक होता है’ और आज ये मेसेज पढने के बाद मुझे तो शिनचैन से और भी ज्यादा लगाव हो गया है, मैं तो चली शिनचैन देखने और आप?
                              -तेजस्विनी ओझा.

Sunday, 21 August 2016

      
                                   क्यों
रे कदम तू चलते चलते डगमगाया क्यों,
आंधीयों से डरकर तू घबराया क्यों.
एक समय था कहा करते थे लोग मुझे,
क्या करेगी तू? कभी सोचा है तूने?
पर आज वो सिर गर्व से उठाते हैं क्यों.
कितनी कोशिश की, समझूँ दुनिया दारी मैं ,
पर भा न पायी चालाकी, मुझे ना जाने क्यों.
शायद जिनको मैं जानती हूँ उन्होंने दिया हौसला मुझे,
तभी मैं सोचूँ तेजस्विनी तूने हिम्मत ना हारी क्यों.
दुःख भी मिले ख़ुशी भी मिली ना हारने दिया पापा आपने मुझे,
गिर के उठकर आपको साथ देखकर आप मुस्कुराए यूँ,
हाथ पकड़ लो बेटा अरे तुम्हारे आखों में ये नमी क्यों,
हूँ ना मैं तुम्हारे साथ!! फिर उठने-गिरने से तू घबराई क्यों??.
कभी गिरना तो पूछना अपने आप से ये सवाल बेटा
कदम तू चलते चलते डगमगाया क्यों??,
आंधीयों से डरकर तू घबराया क्यों??.
                         -राजीव तेजस्विनी ओझा.


Saturday, 13 August 2016

       तेजस्विनी के दोहे #१        
#१ लो आ गया 15 अगस्त, लो आ गया 15 अगस्त,
दुकानदार हज़ारों ऑफर ले कर आये
तरह तरह के ऑफर दे कर, तरह तरह के ऑफर दे कर,
क्यों हमे उल्लू बनाएं रे हाय रे क्यों हमे उल्लू बनाएं.

भगवान् को तो छोड़ दो भगवान् को तो छोड़ दो तुम,
क्यों उन्हें बदनाम कराये,
 उनके नाम पे पैसा ले कर, 

क्यों तो ठगी मचाये रे हाय रे क्यों तू ठगी मचाये.

Thursday, 11 August 2016

                                                              कर दिखाउंगी मैं...
अँधेरे क्यों इतना गुरूर में है तू,
एक दिन सुबह भी मैं लाऊंगी,
उसी सुबह का हाथ पकड़ के,
लोहे से सोना बन के दिखाउंगी.
         -- राजीव तेजस्विनी ओझा.
                           मैं 
हूँ मैं एक लेखक मैं ही अपने लेखों को रचती हूँ,
सोचती हूँ फिर अपनी सोच को कागज़ पे उतारा करती हूँ.
लोगों की बातें प्रोत्साहित भी करती निराश भी करती,
पर फिर भी मैं गिर गिर के उठती हूँ.
रोज़ दिन की शुरुवात मैं मुस्कुरा के करती हूँ,
कुछ भी हो जाए कदम नही पीछे हटने देती हूँ.
सारे संसार की क्या परवाह मुझे,
सिर्फ अपनों की परवाह ही करती हूँ.
बहुत सोच लिया दुनिया के बारे में.
अब दुनिया से अलग राह बनाती हूँ.
हर दिन मेरे लिए नया जोश लाता है और मैं अपने मन से कहती हूँ 
क्या नही कर सकती हूँ ?? मैं क्या नही कर सकती हूँ??
ये वादा सबसे और अपने आप से भी है मुझे,
बस एक मुस्कान से ही सारे जग को जीतूंगी मैं.
चल रही हूँ एक रास्ते पे नही पता मंजिल कहाँ है,
पर पापा आपका हाथ पकड़ के वो मंजिल पर भी पहुँच जाउंगी मैं.
 सब हैं मेरे साथ हौसला बढाने के लिए, औरों की क्या चिंता,
पर एक वादा करती हूँ आप सबका सर गर्व से ज़रूर उठाऊंगी मैं.
                              -राजीव तेजस्विनी ओझा.
                                          

 

    

Sunday, 10 July 2016


टेक केयर जेरी


यह सिर्फ आर्टिकल ही नही है इससे मेरे इमोशंस भी जुड़े हुए हैं। मैं सो रही थी अचानक मम्मी की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी चुन-चुन उठो बेटा  बाज़ार चलना है जल्दी करो नही तो अँधेरा हो जाएगा मैं ऊंघते हुए उठी फटा फट तैयार हुयी । जैसे ही दरवाज़ा खुला बड़ी तेज़ एक छोटी सी प्यारी सी भागती हुयी चीज़ मेरी घर में घुस गयी । उस समय तो ध्यान नहीं गया और जब शॉपिंग कर के लौटे तब तक मेरे दिमाग से बात निकल चुकी थी। अचानक से मम्मी की आवाज़ आई मैं कंप्यूटर पर बैठी थी। मम्मी बोलीं चुन चुन घर में गिलहरी घुस आई है। मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी मैंने सोचा अब क्या होगा। फिर रात हुयी हमलोगों ने खाना खाया और सो गये अगले दिन जैसे ही सुबह मैंने पर्दा खोला तो देखा एक छोटी सी प्यारी सी गिलहरी मेरे शीशे पर बैठी हुयी थी। पर मुझे देखकर ही वो भाग गयी तब मुझे यकीन हुआ की हाँ मेरे घर में एक प्यारी सी गिल्लू घुस आई है । 
यकीन मानिए मेरे ख़ुशी का ठिकाना नही रहा, मैं इतनी खुश थी की एक छोटे से प्लास्टिक के ढक्कन में उसके लिए पानी रखा और कुछ बिस्किट्स भी.. दोपहर में खाना खाते टाइम मेरी नजऱ किचेन की तरह गयी तो मैंने देखा की जेरी अपना थोडा सा सर निकाल के मेरी तरफ देख रही थी मुझे लगा शायद भूख्ी होगी मैंने जाकर उसे एक रोटी का टुकडा दे दिया। मुझे देखकर तो वो भाग गयी पर जैसे ही किचेन से निकलकर मैंने पीछे मुड कर देखा तो जेरी अपने दोनों हाथों से आराम से बैठकर रोटी खा रही थी। मैंने ख़ुशी के मारे मम्मी को भी दिखाया... फिर शाम को भी जेरी मुझे खिडक़ी पर मिली पर ये क्या? मुझे उसका चेहरा देख कर लगा शायद जेरी खुश नही है उदास है । घर में उसका दम घुट रहा है वो परेशान रहने लगी यहाँ तक की हमलोगों से डरने भी लगी। चुप चाप बाहर की बाकी गिलहरियों को देखती हुयी.. हमारा घर फ्लैट है खुली जगह की कमी होने की वजह से शायद जेरी को घबराहट हो रही थी। मुझसे ये नहीं देखा गया मैंने मम्मी से कहा मम्मा जेरी डरी हुयी सी लग रही है वो घबराई हुयी है। मम्मी ने बोला हाँ बेटा  मुझे भी ऐसा ही लग रहा है हमलोगों ने सोचा की मेन डोर खोल देते हैं शायद जेरी बाहर निकल जाए और दरवाज़े के पीछे बने लॉबी में कुर्सी लगा के बैठ गये पर जेरी इतना डरी हुयी थी थोड़ी देर के लिए बाहर निकली भी तो मेन डोर की तरफ जाने के बजाये वो मेरे रूम की तरफ चली गयी। मम्मी बोलीं की इसे निकालने तो बहुत मुश्किल है । जेरी सहमी सहमी रहने लगी अब तो ठीक से खाना भी वो बंद कर चुकी थी । 
मुझे डर था की कहीं जेरी बीमार का पड जाए अब मुझे भी जेरी की चिंता होने लगी थी फिर हमलोगों ने एक प्लान बनाया । वो प्लान ये था की मेन डोर खोल के हमलोग काफी दूर बैठ जायेंगे जिससे जेरी बिना डरे निकल सके । दोपहर हुयी मैं सोने चली गयी गहरी नींद में जब उठी तो मम्मा टीवी देख रहीं थी बोली चुनचुन जेरी चली गयी। मुझे एक पल के लिए तो विश्वास ही नहीं हुआ।  तब मम्मी ने मुझे पूरी बात बतायी की जेरी किस तरह से नजऱें बचाते हुए निकल गयी। 
मुझे एक पल के लिए लगा जेरी क्यों चली गयी पर फिर कुछ देर बाद फील हुआ की नहीं यहाँ जेरी परेशान थी डरी हुयी थी अब वो अपनी फॅमिली के पास है खुश होगी, पेड़ से आम खा रही होगी उछल रही होगी कूद रही होगी खुश होगी.. मेरे मुंह से निकला भगवान करे जेरी जहां भी रहे सेफ रहे खुश रहे.।  शाम को ये सब पापा को बताया तो उन्होंने कहा बेटा उदास मत हो जेरी कुछ दिनों के लिए आई थी उसको तो जाना ही था और वो खुश होगी अपने फैमिली के पास तुम परेशान मत हो जेरी तुम्हें ज़रूर याद रखेगी। इस पर मेरे मुंह से निकला- टेक केयर जेरी, आई विल मिस यू..

Sunday, 10 January 2016

कहीं आप टेक्नोलॉजी मिसयूज के शिकार तो नहीं?


आजकल  टेक्नोलॉजी का जमाना है. लोग हाई-टेक हो रहे हैं. बस एक बटन से आपका मेल दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर पर पहुंच जाता है. पर कुछ लोग इस टेक्नोलॉजी का मिसयूज भी बड़े आराम से और बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से कर रहे हैं.  इसका  उदाहरण रात को टीवी पर आने वाले ऐड हैं जिसमें आसान से क्विज हाते हैं. अगर आपने   दिए गए नंबर्स पर गलती से भी कॉल किया तो गए काम से. आप के फ़ोन बैलेंस से ढेर सारे पैसे कट जाएंगे और अगले दिन से ही कामर्शियल कॉल आने लगेंगी. दूसरा उदाहरण है फ्र्रॉड कॉल्स का . आपके सेल फ़ोन पर एक अननोन नंबर से कॉल आएगी और दूसरी तरफ बैठा व्यक्ति कहेगा की सर आपका एटीएम कार्ड ब्लॉक हो गया है या उसकी डेट खत्म हो गई है. रिन्यू करवाने के लिए ऑनलाइन अप्लाई कीजिए. इसके बाद आपके कार्ड का नंबर पूछा जाएगा. अगर आपने कार्उ नंबर बता दिया तो फिर समझ लीजिये आपकी शामत आ चुकी है. अगर गलती से भी उस व्यक्ति को सारी इनफार्मेशन आपने सही सही दे दी तो आपके नाक के नीचे से आपका सारा बैंक अकाउंट खाली हो चूका होगा. ऐसी खबरें आती रहती हैं फिर भी पढ़े लिखे लोग भी गलतियां करतें हैं.  अगर आपने उस फ्रॉड को पहचान लिया और पुलिस में शिकायत करने की बात की तो वो गालियां देना शुरू कर देगा और फोन काट देगा।  आपाके फोन र कभी भी ऐसे मैसेज आ सकते हैं- मैं अकेली हूं आपसे प्यार भरी बाते करना चाहती हूं. आपसे करने को ढेर सारी बातें हैं बस आपका इस नंबर पर रिप्लाई कीजिए और बन जाएं मेरे सबसे खा़ास दोस्त. अगर आप इसके बहकावे में आये तो बस इस चक्रव्यूह में आप बहुत बुरी तरह फंस जायेंगे. सवाल ये उठ रहा है की ये सब कॉल्स का ध्ंाधा धड़ल्ले से चल कैसे रहा है? इसपर रोक लगाई क्यों नहीं जा रही? टेक्नोलॉजी के मिसयूज पर रोक लगाने में साइबर एक्सपट्र्स बहुत बड़ी भूमिका निभाते सकते हैं , पुलिस की मदद कर सकते हैं , लेागों को आगाह कर सकते हैं। लेकिन उनकी क्षमता का सदुपयोग नहीं हो रहा बल्कि कई आईटी एक्सपर्ट भी टेक्नोलॉजीज के मिसयूज़ में धंधेबाजों की मदद कर रहे बदले में पैसा भी कमा रहे. तो क्या करे आम आदमी? सरकारी साइबर सेल के भरोसे बैठै से अच्छा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से लेागों को अवेयर करें और किसी भी लुभावने ऑफर या अन वांटैड कॉल को रिसीव न करें। दूसरों को दोष देने के बजाय एहतियात बदतने की पहल हमें खुद करनी होगी.

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...