Saturday, 13 August 2016

       तेजस्विनी के दोहे #१        
#१ लो आ गया 15 अगस्त, लो आ गया 15 अगस्त,
दुकानदार हज़ारों ऑफर ले कर आये
तरह तरह के ऑफर दे कर, तरह तरह के ऑफर दे कर,
क्यों हमे उल्लू बनाएं रे हाय रे क्यों हमे उल्लू बनाएं.

भगवान् को तो छोड़ दो भगवान् को तो छोड़ दो तुम,
क्यों उन्हें बदनाम कराये,
 उनके नाम पे पैसा ले कर, 

क्यों तो ठगी मचाये रे हाय रे क्यों तू ठगी मचाये.

1 comment:

rajiv said...

वाह क्या बात

Journey of a happy life...!!!!

शादी,  ये सिर्फ एक शब्द नही है, शादी का असल मतलब आप तब समझ सकते हैं जब आप उस समय को महसूस करते हैं, उसके एक- एक मिनट को जीते हैं। शादी तय हो...